ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
पेशेवर कबड्डी से खिलाड़ियों को देश, विदेश में पहचान मिली है। कबड्डी में अपार संभावनाएं हैं। युवा नशे से दूर रहें, धैर्य रखें और कड़ी मेहनत करें सफलता जरूरी मिलेगी। ये बातें अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी एवं भारतीय राष्ट्रीय कबड्डी टीम के कप्तान पद्मश्री अजय ठाकुर ने सोमवार को डाकपत्थर में आयोजित एक कार्यक्रम में अमर उजाला से साझा कीं।
अजय ठाकुर ने कहा कि बीते दौर में कबड्डी खिलाड़ियों की कोई खास पहचान नहीं थी। इस खेल को पहचान दिलानेवाला भी कोई नहीं था। प्रो कबड्डी शुरू होने से तस्वीर बदल गई है। इसके चलते राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोग कबड्डी और खिलाड़ियों को पहचानने लगे हैं। विभिन्न विभागों में खिलाड़ियों को सम्मानित पद दिए गए हैं। वे खुद डीएसपी हैं। उन्होंने कहा कि गांव और कस्बों में कई खिलाड़ी बेहतर खेलते हैं, लेकिन यदि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं पहुंच पा रहे हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है। धैर्य रखें और यह समझ लें कि रातों रात किसी को सफलता नहीं मिलती। उन्होंने बताया कि वे 13 साल की उम्र से कबड्डी खेलते आ रहे हैं।
सहमत न होने पर कोई कहीं भी जाने को है स्वतंत्र
कबड्डी में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों के चयन में राजनीति हावी होने और भ्रष्टाचार के आरोपों के सवाल पर कप्तान ठाकुर ने कहा कि ऐसा नहीं है। बहुत से फेडरेशन हैं, जो खिलाड़ियों के चयन से सहमत नहीं होते तो कुछ भी आरोप लगाने लगते हैं। कुछ खिलाड़ियों के न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया से सहमत नहीं होने पर कोई भी कहीं भी जाने के लिए स्वतंत्र है।
कबड्डी को ओलंपिक में शामिल करने की जरूरत
भारतीय कबड्डी टीम के कप्तान ने कहा कि कबड्डी को ओलंपिक में शामिल करने की जरूरत है। इस बाबत कई फेडरेशनों की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं।