ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
जिन हाथों में कॉपी, किताब और पेंसिल होनी चाहिए, उन हाथों में रेत-बजरी छानने के लिए बेलचे, फावड़े पकड़ाए गए हैं। स्कूल जाने के बजाय बच्चे भाऊवाला क्षेत्र में आवंटित खनन पट्टों में रेत-बजरी छान रहे हैं।
यहां बच्चों से नदी से रेत बजरी छानने सहित वाहनों में खनन सामग्री भरने का काम कराया जा रहा है। खनन पट्टों पर जांच के लिए अक्सर जाने वाले प्रशासनिक अमले को भी यहां कार्य कर रहे बच्चे दिखाई नहीं देते। पछवादून की नदियों में अवैध खनन के कारोबार के साथ ही श्रम कानूनों का भी मखौल उड़ाया जा रहा है। भाऊवाला क्षेत्र की स्वारना नदी में सबसे बड़ा खनन पट्टा आवंटित किया गया है। इस पट्टे की आड़ में अवैध खनन की शिकायत भी स्थानीय लोग कई बार कर चुके हैं। लेकिन, अब खनन में बाल मजदूरी का मामला भी सामने आया है। यहां रेत-बजरी छानने से लेकर वाहनों में खनन सामग्री भरने के काम में बच्चों को लगाया गया है।
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शिक्षा विभाग भी बना अनजान
बच्चों से नदी में रेत बजरी छानने का कार्य कराए जाने से स्थानीय प्रशासन तो बेखबर है ही। वहीं, शिक्षा विभाग भी अनजान बना हुआ है। नए शिक्षा सत्र में बच्चों के स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए इन दिनों गांव-गांव की खाक छान रहे शिक्षा विभाग के अधिकारियों और शिक्षकों को भी नदी में खनन करते बच्चे दिखाई नहीं दे रहे हैं।
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इन क्षेत्रों में प्रतिबंधित है बाल मजदूरी
14 साल की आयु से कम के बच्चों को किसी फैक्ट्री या खदानों में, खनन कार्य या खतरनाक रोजगारों (जहां जान जाने का ज्यादा जोखिम हो) में बाल मजदूरी को निषेध करने के लिए संविधान में अनुच्छेद 24 के अंतर्गत मौलिक अधिकारों को स्थापित किया गया है। इसके अलावा, अनुच्छेद 21 के अंतर्गत यह भी प्रावधान है कि एक राज्य 6 से 14 साल तक के बच्चे के लिए मुफ्त शिक्षा के लिए सभी आधारिक संरचना और संसाधन उपलब्ध कराएगा।
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यह है बालश्रम पर सजा का प्रावधान
वर्ष 2016 में बालश्रम पर बने नए कानून के तहत 14 साल से कम उम्र के बच्चे से मजदूरी करवाने वाले व्यक्ति को दो साल की कैद और 50 हजार तक जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
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मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर बच्चों से खनन कार्य करवाया जा रहा है, तो ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- भूपेंद्र सिंह धोनी, सीओ
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भाऊवाला क्षेत्र में संपर्क अभियान चलाकर स्कूल से बाहर बच्चों को चिह्नित कर उनके लिए गैर आवासीय शिक्षा केंद्र खोलने का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा।
- आकांक्षा राठौर, उप शिक्षाधिकारी सहसपुर