ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
तीन वर्ष से मानदेय की राह ताक रहे मदरसा शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे शिक्षकों ने बुधवार को सहसुपर स्थित मदरसे में बैठक कर होली तक मानदेय नहीं मिलने पर सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया।
मदरसा शिक्षकों ने कहा कि मानदेय नहीं मिलने से आधुनिक शिक्षा से जुड़े कई शिक्षक मदरसों को छोड़ रहे हैं, जिससे मदरसों में अध्ययनरत नौनिहालों के सामने शिक्षा ग्रहण करने का संकट पैदा हो गया है। यही आलम रहा तो मदरसे मजहबी शिक्षा देने तक ही सीमित रह जाएंगे। मदरसा शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष मो. इस्लाम ने कहा कि सरकार साजिश के तहत शिक्षकों को मानदेय नहीं दे रही है। इससे अधिकांश मदरसे बंद होने की कगार पर हैं। कहा कि मानदेय भुगतान की मांग को लेकर अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक और शिक्षा मंत्री से भी कई बार गुहार लगाई जा चुकी है। बावजूद इसके शासन प्रशासन शिक्षकों का मानदेय व मदरसों का अनुदान रोका जा रहा है। जबकि, सभी मदरसे सरकार के नियमों का पालन करते हुए आधुनिक शिक्षा दे रहे हैं। कहा कि पछवादून के पांच मदरसों में कार्यरत 20 शिक्षकों सहित राज्य भर के 155 मदरसों के शिक्षकों को एसपीईएमएम के तहत दो श्रेणियों में मानदेय दिया जाता है। प्रशिक्षित शिक्षकों को केंद्र सरकार 12 हजार व अप्रशिक्षित शिक्षकों को छह हजार प्रतिमाह मानदेय देती है। लेकिन, पिछले तीन साल से शिक्षकों को मानदेय नहीं मिल रहा है।
बैठक में होली से पूर्व मानदेय नहीं मिलने पर बेमियादी धरना प्रदर्शन शुरू करने का निर्णय लिया गया। इस दौरान अब्दुर्रहमान, यशवीर, राकेश, बिलकिश फातिमा, राजेश, सुरेंद्र शर्मा, खालिद हसन, मुहम्मद अंजार, शमीम, सरफराज नवाज, खालिद अंसारी, नक्कास अली आदि शामिल रहे। उधर, अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक धीरेंद्र सिंह दत्ताल ने बताया कि केंद्र सरकार को मदरसा शिक्षकों के मानदेय आहरण संबंधी प्रस्ताव भेजा जा चुका है। केंद्र से बजट जारी होते ही मानदेय आहरित कर दिया जाएगा।