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बिन्हार को मूलभूत सुविधाओं की दरकार

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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
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पछवादून के दूरस्थ पिछड़ा क्षेत्र बिन्हार की 10 हजार की आबादी राज्य गठन के अठारह वर्ष बाद भी मूलभूत सुविधाओं की राह ताक रही है। यहां शिक्षा, स्वास्थ्य, यातायात की सुविधाएं नहीं होने से ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 50 किमी से अधिक की दूरी नापनी पड़ रही है।
पांच वर्ष पूर्व प्रदेश सरकार ने इस क्षेत्र को पिछड़ा मानते हुए यहां के लोगों को ओबीसी की श्रेणी में शामिल किया था। लेकिन, पिछड़ा क्षेत्र का दर्जा मिलने के बाद भी यहां की दशा में कोई सुधार नहीं आया है। बिन्हार क्षेत्र की एक दर्जन ग्रामीण बस्तियों में 10 हजार की आबादी रहती है, लेकिन यहां स्वास्थ्य सुविधा के लिए एक भी स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। ग्रामीणों को उपचार के लिए 50 किमी दूर विकासनगर की दौड़ लगानी पड़ रही है। क्षेत्र में मात्र एक राजकीय हाईस्कूल है। इंटर की पढ़ाई के लिए छात्र-छात्राओं को 20 से 30 किमी की दूरी नापकर राजकीय इंटर कॉलेज लांघा और राइंका कटापत्थर जाना पड़ता है।
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क्षेत्र के कांडोई, भदोगी, उदियाखेत, बाइला, नयाखील, बाइल्डखील गांव मोटर मार्ग से वंचित हैं। मोटर मार्ग नहीं होने से ग्रामीणों को दैनिक उपयोग का सामान लाने के लिए चार से पांच किमी की पैदल दूरी नापनी पड़ती है। सड़क नहीं होने से ग्रामीण अपनी नगदी फसलों को मंडी तक नहीं पहुंचा पाते हैं। स्थानीय निवासी कैलाश तोमर, सत्यपाल सिंह, सुरेश, नवीन तोमर, मोहन सिंह, कपिल, सुनील, सुरेश नेगी, अरविंद सिंह ने बताया कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि विकास के सपने दिखाते हैं। लेकिन, चुनाव के बाद क्षेत्र की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं देता। बताया कि दो वर्ष पूर्व क्षेत्र में पहली बार एसडीएम और अन्य प्रशासनिक अधिकारी आए थे, जिन्होंने ग्रामीणों को समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया था। इसके बाद भी क्षेत्र के लोगों की दशा में कोई अंतर नहीं आया है। उधर, तहसीलदार प्रकाश शाह ने बताया कि बिन्हार क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए उचित माध्यम से प्रस्ताव भेजा गया है।
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