ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
बदलते दौर में बढ़ती बेरोजगारी बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में कई बार बेटियों को रोजगार नहीं मिलने से भारी आर्थिक परेशानी उठानी पड़ती है। उन्हें अपनी इच्छा से कुछ खरीदने या फिर करने के लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन पछवादून में बेटियां और महिलाएं संगठित होकर स्वरोजगार कर आत्मनिर्भर बन रहीं हैं।
यह कहना है छोटे-छोटे स्वयं सहायता समूह बनाकर स्वरोजगार कर रहीं महिलाओं का। रोजमर्रा के काम से समय निकालकर स्वरोजगार कर रहीं इन महिलाओं ने मंगलवार को केशवमाधवपुरम डाकपत्थर में अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स महा अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में अपने अनुभव साझा किए। श्री स्वयं सहायता समूह के कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि समाज सेवी अनीता अग्रवाल ने किया। उन्होंने कहा कि घर का काम निपटाने के बाद हर रोज कुछ समय स्वरोजगार के लिए निकालने की महिलाओं की यह पहल अनुकरणीय है। इससे निश्चित रूप से बेटियां और पूरा परिवार सशक्त होगा। ओरियेंटल बैंक ऑफ कॉमर्स ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक ललित कुमार गुप्ता ने कहा कि संस्थान की ओर से महिलाओं को डेरी, मधुमक्खी पालन, बकरी पालन, मशरुम उत्पादन, अचार पापड़ बनाने आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इच्छुक महिलाएं दस से 45 दिनों का निशुल्क प्रशिक्षण ले सकतीं हैं।
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ये रहे मौजूद
टीना जुवांठा कौर, ललित कुमार गुप्ता, कविता उपाध्याय, राखी अग्रवाल, बबीता रानी, प्रेम कौर, कमलेश, सुषमा राणा, गुरप्रीत कौर, बबली, उमा देवी जोशी, मीरा चौधरी, अर्णिमा कौशिक, नीतू सिंह, अनीता अग्रवाल, प्रमीला पांडे, सुमन बाला शर्मा, अनीता शर्मा आदि कार्यक्रम का हिस्सा बनीं।
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लोगों ने मजाक बनाया, हमने आत्मनिर्भर बनकर दिखाया
- अमर उजाला अपराजिता महाअभियान कार्यक्रम में बोली महिलाएं
अमर उजाला ब्यूरो
विकासनगर। घर के रोजमर्रा के कामों से समय निकालकर हमने नौ महीने पहले अचार और पापड़ बनाने का काम शुरू किया। इस पर कुछ लोगों ने मजाक बनाया, लेकिन हमने इसकी परवाह किए बगैर अपना काम जारी रखा और आत्मनिर्भर बनकर दिखाया। यह कहना है श्री स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष मोना चौहान का।
उन्होंने बताया कि काम शुरू करने के लिए महिलाओं के पास पैसा नहीं था, तो सभी महिलाओं ने पांच-पांच सौ रुपये जमा कर कच्चा उत्पाद खरीदा। आज उनके समूह के पास सभी खर्च निकालने के बाद तीस हजार रुपये जमा हैं। मोना चौहान ने कहा कि क्षेत्र की महिलाएं पहले शौकिया तौर पर अपने घर परिवार की जरूरत के लिए अचार और पापड़ बनातीं थीं, लेकिन नौ महीने पहले 11 महिलाओं ने मिलकर इसे स्वरोजगार का रूप देने का निर्णय लिया। महिलाएं हर रोज अपने घर का काम निपटाने के बाद यहां एकत्र होती हैं। इनमें से कुछ महिलाएं कच्चा उत्पाद लेकर आतीं हैं तो कुछ महिलाएं इसे पकाने और पैकिंग का काम करतीं हैं। शुरूआत में इसकी बिक्री में भी हमें परेशानी हुई। यहां तैयार उत्पाद नहीं बिका तो हमने इसे अपनी रिश्तेदारी में बेचना शुरू किया, लेकिन अब सब ठीक है। यहां तैयार उत्पाद न सिर्फ विकासनगर बल्कि देहरादून और दिल्ली तक जा रहा है।
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महिलाएं शिक्षित और जागरूक होंगी तो उन्हें विभिन्न योजनाओं की जानकारी होगी। महिलाओं के लिए सरकार ने कई तरह की योजनाएं चलाईं हैं। इसका लाभ उठाकर वे स्वरोजगार कर आत्मनिर्भर बन सकतीं हैं। क्षेत्र की महिलाओं की यह पहल बहुत अच्छी है, अन्य महिलाओं को भी इस दिशा में आगे आना चाहिए। - टीना जुवांठा कौर
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शुरू से ही मन में इच्छा थी कि कुछ करना है। कुछ समय स्कूल में बच्चों को पढ़ाया, लेकिन इससे घर और बच्चों पर ध्यान नहीं दे पा रही थी। अब स्वरोजगार शुरू किया तो घर और बच्चों पर पूरा ध्यान दे पा रही हूं। आत्मनिर्भर होने से खुद को अच्छा महसूस हो रहा है। - अनीता शर्मा, कोषाध्यक्ष स्वयं सहायता समूह
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गृहणी होने के नाते पहले केवल घर परिवार का कामकाज था। अब अन्य महिलाओं के साथ मिलकर काम शुरू किया है, इससे बहुत कुछ सीखने और सिखाने का मौका मिला। भविष्य में धीरे-धीरे इस काम को आगे बढ़ाया जाएगा और वे दिन भी दूर नहीं जब उनकी अचार और पापड़ की बड़ी फैक्ट्री होगी। - राखी अग्रवाल
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मैं स्कूल में बच्चों को पढ़ाती हूं। स्कूल से आने के बाद घर का काम और इसके बाद जो समय बचता है उसमें इन महिलाओं के साथ हाथ बटातीं हूं। हमारी देखा देखी क्षेत्र की अन्य महिलाएं भी अब बैग, सिलाई एवं अन्य काम करने का मन बना रहीं हैं। महिलाएं संगठित होकर कुछ करेंगी तो निश्चित रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी। - गुरप्रीत
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बच्चे कॉलेज चले जाते हैं, घर पर काम करने के बाद भी काफी समय बच जाता है, ऐसे में हमने निर्णय लिया कि क्यों न इस समय का सदउपयोग किया जाए। - उमा जोशी
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क्षेत्र की महिलाओं द्वारा किया गया यह प्रयास सराहनीय है। महिलाएं घर से निकलकर कुछ करेंगी तो निश्चित रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी। अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे आना चाहिए। - सुषमा राणा
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मैंने अचार, पापड़ बनाने एवं ब्यूटी पार्लर का कोर्स किया है। प्रयास किया जाएगा कि अन्य महिलाओं को इसका प्रशिक्षण दूं, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। - कमलेश प्रजापति
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अपराजिता महाअभियान एक सुंदर और अनूठी पहल है। इससे निश्चित रूप से बेटियां और पूरा समाज सशक्त होगा। - कविता उपाध्याय