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खूब पढ़ेंगी तभी आत्मनिर्भर बनेंगी बेटियां

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ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
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हमें जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए खूब पढ़ना होगा और आत्मनिर्भर बनना होगा। खूब पढ़ेंगी तभी बेटियां आत्मनिर्भर बनेंगी। इस राह में कुछ मुश्किलें भी आएंगी, लेकिन हमें इनका सामना कर इससे पार पाना है।
यह संकल्प बृहस्पतिवार को राजकीय इंटर कॉलेज भीमवाला में अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स महाअभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने लिया। इस दौरान कई छात्राओं ने अपने अनुभव साझा किए। स्वाती राठौर, वंशिका और ऋतिका पंवार ने कहा कि कई लड़कियों विभिन्न क्षेत्रों में देश प्रदेश का मान बढ़ाया है। हमें उनसे प्रेरणा मिलती है। हालांकि बड़ी संख्या में लड़कियां शिक्षा की मुख्य धारा से अलग थलग है। हमें खुद पढ़ाई करने के साथ इन्हें भी शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल करना हैं। मीना ने कहा कि वे अपने माता पिता के चेहरे पर हमेश मुस्कान देखना चाहती है। परिजनों की खुशी के लिए वे खूब पढ़ेगी और भविष्य में टीचर बनकर आत्मनिर्भर बनेगी। अमनदीप और आरजू ने कहा कि भविष्य में डॉक्टर बनने की चाहत है। शिक्षक राजनारायण मिश्र ने कहा कि बेटियां पढ़ेंगी तो घर, परिवार, समाज और देश तरक्की करेगा। जिस परिवार में बेटियां खुश नहीं हैं उस परिवार में खुशी नहीं आ सकती। शिक्षिका सीमा भंडारी और रेणुका बलूनी ने महिला सशक्तीकरण व जागरुकता के अपने घरों से पहल करने पर जोर दिया।
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ये बने कार्यक्रम का हिस्सा
प्रिंसिपल आरसी कांडपाल, शिक्षक लाल बहादुर सिंह, एमएस रावत, महावीर सिंह बिष्ट, धन सिंह कंडारी, संजीव मिश्र, वीसी जोशी, रश्मि कंडारी, विजय पाल, विजय प्रकाश, सुषमा देवी आदि मौजूद रहे।
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नारी के शिक्षित होने से परिवार और समाज शिक्षित होता है। भारत में प्राचीनकाल से ही नारी शिक्षा पर जोर दिया जाता रहा है। पुराणों व भारतीय इतिहास में नारियों की विद्वता के कई प्रसंग हैं। वर्तमान दौर में भी शिक्षा से ही नारी समाज का उत्थान संभव है। शिक्षा के माध्यम से नारी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होगी।
-सीमा भंडारी, शिक्षिका

प्राचीनकाल से ही भारतीय समाज में महिलाओं का उच्च स्थान रहा है। महिलाएं कभी भी पुरुषों से पीछे नहीं रही हैं। वर्तमान दौर में पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं की दशा कुछ दयनीय हुई है। बावजूद इसके महिलाएं समाज के हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं।
-रेणुका बलूनी, शिक्षिका
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बेटियों को आगे बढ़ने के लिए उचित संसाधन मुहैया कराने से ही बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान सफल होगा। बेटियों में प्रतिभा होती है, लेकिन अवसर नहीं दिए जाने से वे अपनी प्रतिभा का उपयोग नहीं कर पाती हैं। लिहाजा बेटियों को भी बेटों के समान अवसर दिए जाने चाहिए।
-गुरप्रीत कौर, छात्रा
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शिक्षा के साथ ही बेटियों को अन्य गतिविधियों में प्रतिभाग करने की छूट दी जानी चाहिए। जिससे कि वे अपनी नैसर्गिक प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। इस दिशा में अमर उजाला फाउंडेशन की पहल सराहनीय है। इस पहल से समाज की मानसिकता में परिवर्तन आएगा।
-पायल राठौर, छात्रा
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समाज के समान अवसर पाने के लिए बेटियों को शारीरिक व मानसिक तौर पर परिपक्व होना होगा। इसके लिए जरूरी है कि बेटियां शिक्षा के साथ ही खेल व अन्य गतिविधियों में भी भागीदारी निभाएं। अमर उजाला की पहल से समाज की मानसिकता में परिवर्तन आने की उम्मीद जगी है।
-आइशा, छात्रा
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सम्मान व सफलता हासिल करने में शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शिक्षा पाना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। वर्तमान में समाज के कई समुदाय बालिका शिक्षा के प्रति संवेदनशीलता नहीं है। बेटियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए उन्हें उच्च शिक्षित किया जाना जरूरी है।
-रितिका, छात्रा
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शिक्षा के साथ ही रोजगार के समान अवसर मुहैया कराने से ही बेटियां आत्मनिर्भर बन कर सशक्त होंगी। लिहाजा शिक्षा ग्रहण करने के बाद बेटियों को उनकी पसंद का रोजगार करने की छूट दी जानी जरूरी है।
-सबीरा, छात्रा
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बेटियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए सरकार ने कई योजनाओं का संचालन किया है। इसके लिए समाज का भी जागरूक होना जरूरी है। जब समाज की सोच बदलेगी तभी महिला सशक्तीकरण अभियान सफल होगा। समाज का बड़ा तबका आज भी बेटी व नारी के प्रति संकीर्ण मानसिकता अपनाए हुए है।
-सुहानी पंवार, छात्रा
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समाज को बदलने का सबसे शक्तिशाली हथियार शिक्षा है। बेटियों को शिक्षित करने के साथ ही पुरुष प्रधान समाज को नैतिक शिक्षा व अपनी सोच बदलने की शिक्षा दी जानी चाहिए। जिससे समाज में बेटियां निर्भीक होकर अपने मुकाम की ओर बढ़ सकें।
-आरजू चौहान, छात्रा
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बेटियों को सफलता हासिल करने के लिए किसी सहारे की जरूरत नहीं है। वे खुद अपनी मंजिल प्राप्त कर सकती हैं। कुछ असामाजिक तत्वों से बेटियों की सुरक्षा के लिए उन्हें विद्यालयों में आत्मरक्षा का प्रशिक्षण अनिवार्य तौर पर दिया जाना चाहिए।
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-संजना, छात्रा
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बेटियों को शिक्षा के साथ ही व्यावहारिक ज्ञान दिया जाना भी जरूरी है। जिससे उन्हें बाहरी समाज की जानकारी हासिल हो सके। इसके लिए बेटियों को विद्यालयों में होने वाली शिक्षणेत्तर गतिविधियों में प्रतिभाग करने के अधिक अवसर मुहैया कराए जाने चाहिए।
-कनुप्रिया, छात्रा
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