ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
हरबर्टपुर के विवेक विहार में चल रहे श्रीमद्भागवत महापुराण के दूसरे दिन भागवत कथा श्रवण के महत्व का वर्णन किया गया। कथा व्यास शक्ति प्रसाद देवली ने कहा कि कलियुग में श्रीमद्भागवत महापुराण श्रवण कल्पवृक्ष से भी बढ़कर है। क्योंकि कल्पवृक्ष मात्र तीन वस्तु अर्थ, धर्म और काम ही दे सकता है। मुक्ति और भक्ति नही दे सकता है। लेकिन श्रीमद्भागवत तो दिव्य कल्पतरु है। यह अर्थ, धर्म, काम के साथ साथ भक्ति और मुक्ति प्रदान करके जीव को परम पद प्राप्त कराता है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल पुस्तक नहीं साक्षात श्रीकृष्ण स्वरूप है। इसके एक-एक अक्षर में श्रीकृष्ण समाए हुए हैं। कथा सुनना समस्त दान, व्रत, तीर्थ, पुण्य कर्मों से बढ़कर है। कहा कि भागवत के चार अक्षर इसका तात्पर्य यह है कि भा से भक्ति, ग से ज्ञान, व से वैराग्य और त त्याग जो हमारे जीवन में प्रदान करे, उसे हम भागवत कहते हैं। इस दौरान अतुल शर्मा, गोवर्धन डोभाल, विनोद देवली, रामकुमार रतूड़ी, आदित्य सेमवाल, प्रवीन ड्यूंडी, कृष्णलाल धीमान, अलका शर्मा, उर्मिला शर्मा आदि मौजूद रहे।