श्रीनगर। पिछले ढाई माह से कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) उत्तराखंड के छात्र-छात्राओं के आज सोमवार से कक्षाओं में लौटने की संभावना है। हालांकि छात्र-छात्राओं ने अभी अपना आंदोलन वापस लेने की सूचना संस्थान को नहीं दी है। इस बीच, संस्थान ने श्रीनगर और सेटेलाइट परिसर एमएनआईटी जयपुर दोनों स्थानों में कक्षा संचालन की पूरी तैयारी कर ली है। यह भी सोमवार (आज) को ही स्पष्ट हो पाएगा कि कितने छात्र-छात्राएं जयपुर पढ़ाई करने पहुंचे हैं।
एनआईटी के स्थायी कैंपस का निर्माण होने तक अस्थायी कैंपस के सुविधाजनक स्थान में स्थानांतरण सहित अन्य मांगों के लिए एनआईटी उत्तराखंड के छात्र-छात्राओं ने चार अक्तूबर से कक्षाओं का बहिष्कार शुरू किया था। मांग पूरी न होने पर वह 23 अक्तूबर को हॉस्टल छोड़कर घर चले गए। 27 नवंबर से छात्र-छात्राएं जंतर-मंतर दिल्ली में धरने पर बैठ गए। इसके बाद एमएचआरडी (मानव संसाधन विकास मंत्रालय) ने एनआईटी जयपुर के खाली भवनों में 500 छात्र-छात्राओं के लिए तीन साल के लिए सेटेलाइट कैंपस संचालित करने का निर्णय लिया। इसके लिए छात्रों से विकल्प मांगे गए कि कौन श्रीनगर पढ़ना चाहता है और कौन जयपुर?
आज से एनआईटी प्रशासन ने दोनों परिसरों में कक्षाओं के संचालन तैयारी कर दी है। लेकिन संस्थान को यह नहीं पता कि कितने छात्र-छात्राओं ने जयपुर का विकल्प दिया है। अधिकारियों के अनुसार छात्र-छात्राएं सीधे एमएचआरडी के संपर्क में हैं। जो भी पत्राचार हो रहा है, छात्रों और एमएचआरडी के बीच में हो रहा है।
एमएनआईटी जयपुर के खाली भवन आएंगे काम
श्रीनगर। एमएनआईटी (मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) जयपुर ने आगामी शिक्षण सत्र 2019-2020 से कक्षाओं का विस्तार करना था, इसलिए वहां कक्षा कक्ष और हॉस्टल का निर्माण हुआ है। यह भवन तीन साल के लिए एनआईटी उत्तराखंड के काम आएंगे। जब तक वहां एनआईटी उत्तराखंड की कक्षाएं संचालित होंगी, तब तक एमएनआईटी जयपुर की कक्षाओं का विस्तार होना मुश्किल है।
जयपुर में रहेंगे निदेशक मौजूद
श्रीनगर। दो परिसरों में विभाजित हो चुके एनआईटी उत्तराखंड के जयपुर परिसर को निदेशक प्रो. श्याम लाल सोनी और श्रीनगर परिसर को कुलसचिव कर्नल सुखपाल सिंह देखेंगे। जबकि अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी एक-एक माह के रोस्टर पर लगाई जाएगी।
कोट-------------
-आज से दोनों स्थानों में कक्षा संचालन की उम्मीद है। दोनों स्थानों में छात्रों की संख्या हमारे पास उपलब्ध नहीं है।
-कर्नल सुखपाल सिंह, कुलसचिव, एनआईटी उत्तराखंड