- बूढ़ी दिवाली पर जौनसार बावर में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर मना भिरुड़ी पर्व
ब्यूरो/अमर उजाला
साहिया। जौनसार बावर में भिरुड़ी पर्व धूमधाम से मनाया गया। क्षेत्र के हर गांव में शनिवार को पूरे दिन तांदी, रासों, हारूल और लोकगीतों की धूम रही। वहीं, लोगों ने मंदिरों में पूजा अर्चना कर अपने ईष्ट देव से देशवासियों की सुख एवं समृद्धि की कामना की। परंपरानुसार लोगों ने भीमल की लकड़ियों की मशाल (जिसे होलियात कहा जाता है) जलाकर भिरुड़ी पर्व मनाया।
अनूठी लोक संस्कृति के लिए प्रसिद्ध जनजाति क्षेत्र जौनसार बावर में तीज त्योहार, शादी समारोह मनाने के तरीके निराले हैं। क्षेत्र में बूढ़ी दिवाली इसी अनूठी लोक संस्कृति का बड़ा उदाहरण हैं। देश भर में मनाई जाने वाली दिवाली के ठीक एक महीने बाद शनिवार को जौनसार बावर क्षेत्र में बूढ़ी दिवाली मनाई गई। गांव में जगह-जगह होलियात जलाए गए। इसके बाद मंदिरों में पूजा अर्चना की गई। दोपहर को सभी गांववासी एक बार फिर पंचायती आंगन में एकत्र हुए और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसमें सबसे पहले महासू देवता के गीत और हारूल गाई गई। उसके बाद जेन्ता, रासो सहित कई गीत गाए गए। कार्यक्रमों के दौरान महिला एवं पुरुष पारंपरिक जौनसारी वेशभूषा में नजर आए। सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद लोग गांव में एक स्थान पर एकत्र हुए। जहां गांव के स्याणा ने एक ऊंचे स्थान से अखरोट फेंककर भिरुड़ी का पर्व मनाया।
ऊंडी दे ढाकिया सुने की हरियाडी....
महिलाओं ने ऊंडी दे ढाकिया सुने की हरियाडी... गीत गाकर बाजगी समाज के लोगों को पीली दूब और हरियाली देकर शुभकामनाएं दीं। इसके बदले पुरुषों ने उन्हें अखरोट और चिवीड़ा-मुड़ा दिया। क्षेत्र में परंपरागत रूप जगह-जगह इस तरह से भिरुड़ी पर्व मनाया गया।