ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। एंटीबायोटिक दवाओं का गलत तरीके से इस्तेमाल चिंता का विषय है। रोगियों को विशेषज्ञ चिकित्सक से स्वास्थ्य परीक्षण कराने और उनके परामर्श के बाद ही एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग करना चाहिए। सीजनल बुखार, वायरल, सर्दी जुकाम में मन मुताबिक एंटीबायोटिक लेने से परहेज करना चाहिए। यह जानकारी एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने कही। वह मेडिसिन विभाग, फार्माकोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे।
एम्स निदेशक ने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं का गलत व मनमुताबिक उपयोग करना खतरनाक है। कई लोग सामान्य रोगों, मौसमी बीमारियों, वायरल, सर्दी जुकाम के लिए भी फार्मेसिस्ट व मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक दवा लेकर उसे खा लेते हैं। जबकि इस तरह के रोगों में एंटीबायोटिक की जरूरत ही नहीं पड़ती। एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग से ही एंटीमाइक्रोबियल रजिस्ट्रेंस की समस्या उत्पन्न हो रही है। इस अवसर पर डॉ. अपूर्वा शंकर जोशी, मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. मीनाक्षी धर, डॉ. पीके पांडा, डॉ. पुनीत धमीजा, डॉ. रविकांत, प्रो. प्रतिमा गुप्ता, प्रो. एसएस हुंडू, डॉ. बलराम ओमर, डॉ. मनु, डॉ.संतोष कुमार आदि मौजूद थे।
वयस्कों का टीकाकरण भी जरूरी
अमेरिकन कॉलेज ऑफ फिजिशियन के इंडियन चैप्टर के गवर्नर डॉ. बीए मुरुगनाथन ने बच्चों के साथ ही वयस्कों के टीकाकरण को जरूरी बताया। उन्होंने वयस्कों को अनिवार्य रूप से लगने वाले टीकों की जानकारी दी। दिल्ली एम्स के डॉ. पीयूष रंजन व डॉ. आरपी कपिल ने अपने संस्थान में होने वाली एंटी माइक्रोबियल स्टीवार्डशिप पर अनुभव साझा किए। डॉ. एसएस संधू ने देश के विभिन्न हिस्सों में एंटीबायोटिक के प्रयोग की प्रणाली पर प्रकाश डाला।