ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। दिव्यांगता अभिशाप नहीं है। हमारे बीच भी कई ऐसे दिव्यांग हुनरमंद हैं, जिन्हें सही मौका और ट्रेनिंग मिले तो वे भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लें। यह बात एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने कही। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगता दिवस पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में जन जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। नर्सिंग की छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक के जरिये बताया कि हेलेन केलर, सुधा चंद्रन, देवेंद्र जझारिया और स्टीफन हॉकिंग ने दिव्यांगता के बावजूद अपने अपने क्षेत्र में सर्वोच्च मुकाम हासिल किया।
भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग व नर्सिंग कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में ओपीडी में विभिन्न जन जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किये गए। एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने कहा कि राष्ट्र की जीडीपी में दिव्यांगों का भी उतना ही योगदान है, जितना कि किसी अन्य का। उन्होंने कहा कि यदि दिव्यांग व्यक्ति को उचित अवसर और अपेक्षित सहयोग दिया जाए, तो वह अपने जीवन में उच्च मुकाम हासिल कर दूसरे लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकते हैं।
संस्थान के भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग (पीएमआर) के विभागाध्यक्ष डॉ. राजकुमार यादव ने बताया कि विभाग में शारीरिक रूप से दिव्यांग रोगियों का उपचार पुनर्वास विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है। विभाग में फिजियोथैरेपी, ऑक्यूपेशनल थैरेपी, प्रोस्थोटिक व ऑर्थोटिक कृत्रिम अंग लगाने की सुविधा उपलब्ध है। इस अवसर पर संस्थान के उप निदेशक प्रशासन अंशुमन गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. ब्रह्मप्रकाश, डीन एनुमनई प्रो. बीना रवि, डीन एकेडमिक प्रो. सुरेखा किशोर, डीन नर्सिंग प्रो. सुरेश शर्मा, रजिस्टार राजीव चौधरी आदि उपस्थित रहे।