श्रीनगर। गढ़वाल विवि के दीक्षांत समारोह आयोजन को लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विवि को शुभकामनाएं दी। कुलपति को भेजे संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा है कि गढ़वाल विवि प्रकृति गोद में बसी देवभूमि में स्थित है। इसलिए विवि को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों से ओतप्रोत शिक्षा को विभिन्न पाठ्यक्रमों में शामिल करना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा है कि शिक्षा युवाओं के चरित्र निर्माण का एक माध्यम है, जो राष्ट्र निर्माण में सहायक है। शिक्षा को व्यवहारिक ज्ञान एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोंण को विकसित करने की दिशा में कार्य करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उदाहरण देते हुए कहा कि एक देश के विकास का मापदंड उसकी जनता की शिक्षा एवं विद्वता से मापा जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कुलपति प्रो. नौटियाल को भेजे संदेश में लिखा है कि एक सर्वग्राही शिक्षा का मूलतत्व उसकी आविष्कार की क्षमता है। बिना इसके शिक्षा बहुत ही नीरव हो जाती है। प्रधानमंत्री ने लिखा है कि गढ़वाल विवि प्रकृति गोद में बसी देवभूमि में स्थित है।
स्थानीय परंपराएं दिखी दीक्षांत समारोह में
श्रीनगर। गढ़वाल विवि दीक्षांत समारोह में परिधान के अलावा अन्य सभी औपचारिकताओं में स्थानीय परंपराओं का पूरा ध्यान रखा गया। गढ़वाल विवि के दीक्षांत समारोह में अतिथियों का स्वागत उत्तराखंड के पारंपरिक वाद्य यंत्रों ढोल दमाऊं से किया गया। विवि प्रशासन ने समारोह में इस बात कर पूरा ध्यान रखा था कि किसी भी प्रतिबंधित वस्तु का प्रयोग न हो। मंच पर अतिथियों के लिए प्लास्टिक के बजाय मेटल से बनी पानी की बोतलें रखी गई थी। समारोह में उपस्थित गणमान्यों को कपड़े के थैले में मुख्य अतिथियों के भाषण की प्रति दी गई। कपड़े का बैग विवि के उमंग प्रोजेक्ट की ओर से तैयार किया गया था।