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सीमित संसाधनों में काम करना ही व्यक्ति की श्रेष्ठता

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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
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मानव संसाधन विकास मंत्रालय, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण शिक्षा परिषद और श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय की ओर से सिंघनीवाला स्थित शिवालिक इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज में कार्यशाला हुई। कार्यशाला में वक्ताओं ने ‘शिक्षक-प्रशिक्षकों को महात्मा गांधी के प्रस्तावित प्रयोगिक शिक्षा एवं नई तालीम’ विषय पर विचार रखे।
कार्यशाला का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के सलाहकार डॉ. एमएसएम रावत, श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति डॉ. यूएस रावत और इंस्टीट्यूट के वाइस चेयरमैन अजय कुमार ने किया। डॉ. यूएस रावत ने कहा कि सीमित संसाधनों और अवसरों में काम करना ही व्यक्ति की श्रेष्ठता है। उन्होंने उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा और उनकी महत्वता को छात्रों तक पहुंचाने की बात कही। डॉ. एमएसएम रावत ने कहा कि बेरोजगारी की समस्या का निराकरण महात्मा गांधी की प्रस्तावित नई तालीम से ही संभव है। वर्तमान में शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में गढ़वाल विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर सीमा धवन, डॉ. डीपी गुप्ता ने भी विचार रखे। कार्यशाला के समन्वयक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण शिक्षा परिषद हैदराबाद के दुर्गा सथ्या क्रॉत थेे।
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इस मौके पर शिवालिक इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल इस्टडीज के प्रधानाचार्य डॉ. पीके उपाध्याय, डीन डॉ. यूसी गुप्ता, चेतन शर्मा, अंकित झा, शालिनी, फातिमा, डॉ. यशवंत कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
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