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..हे नंदा हिंवाली, राजी-खुशी राखी, जौ जस देई

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जोशीमठ। उर्गम घाटी में आयोजित तीन दिवसीय नंदा-स्वनुल कौथिग में बृहस्पतिवार को जागरों के साथ मां नंदा और स्वनुल का आह्वान किया गया। देवी-देवताओं ने अपने निशाणों के साथ नृत्य किया और भक्तों ने आराध्य देवताओं से परिवार की कुशलता की मनौतियां मांगीं। घंटाकर्ण मंदिर परिसर में दिनभर भक्तों का हुजूम उमड़ा और शाम को महिलाओं ने भजन-कीर्तन का आयोजन किया।
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उर्गम घाटी में 42 साल बाद नंदा-स्वनुल कौथिग का आयोजन किया जा रहा है। बृहस्पतिवार को ध्याणियों ने हे नंदा हिंवाली जौ जस देई जैई..., जै देवी नंदा तेरी सेवा करदा..., राजी-खुशी राखी नंदा-सुनंदा..., रूप की अग्वाली नंदा..., देवी स्वनुल कुशलक्षेम राखी मेरा कुटुंब-परिवार... आदि जागरों से मां नंदा और स्वनुल का आह्वान किया। पुजारी मान सिंह ने सभी देवताओं की पंच पूजा की। देवताओं के निशाणों का शृंगार और शक्ति पूजा की गई। घंटाकर्ण देवता ने पश्वा पर अवतरित होकर भक्तों को आशीर्वाद दिया। इसके बाद वाद्य यंत्रों की थाप पर जाख देवता, चंडिका, भूमियाल, दाणी देवता और घंटाकर्ण देवता ने अपने पश्वा पर अवतरित होकर नृत्य किया और भक्तों को आशीर्वाद दिया। इस दौरान महिलाओं ने झुमेलो और चांचड़ी नृत्य भी किया। नंदा और स्वनुल देवी के दर्शनों को ध्याणियां भी अपने मायके पहुंची हुई हैं। ध्याणियों ने दोनों देवियों को शृंगार सामग्री भेंट की। इस मौके पर कौथिग समिति के अध्यक्ष राजेंद्र रावत, ग्राम प्रधान लक्ष्मण सिंह नेगी, वीरेश्वर नेगी, अनूप नेगी, कुंवर सिंह, रघुवीर सिंह, कुंवर सिंह चौहान, बीएस रावत के साथ ही कई लोग मौजूद थे।
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