ब्यूरो/अमर उजाला, डोईवाला। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा दो बागियो के चुनाव मैदान में होने के बावजूद सटीक रणनीति नही बना पाई। नतीजा जीत के करीब पहुंचकर हार का सामने करने के लिए विवश होना पड़ा। भाजपा में भितरघात की संभावनाऐं भी चर्चाऐं में आ गई है। भाजपा अपने ही गढ़ में परास्त होकर सन्न हो गई है। भाजपा के लिए परेशानी का सबब उसके अपने बागी उम्मीदवारों ने कई बूथों पर धूल चटा दी। भाजपा के दो बागी उम्मीदवारों की चुनाव में मौजूदगी के बावजूद सटीक चुनावी रणनीति का अभाव हार का कारण बना है। निर्दलीय मधु डोभाल की कई वार्डों में मजबूत स्थिति दिखाई देने के बावजूद भाजपा ने उन वार्डों को गंभीरता से नहीं लिया।
नतीजा यह हुआ कि भाजपा ने वार्ड सदस्य पदों पर तो जीत दर्ज कर ली लेकिन अध्यक्ष पद पर काफी पिछड़ गई। काफी अंतर से पिछड़ने के कारण कांग्रेस की जीत की राह आसान हो गई। हालांकि रणनीतिकारों ने मलिन बस्तियों पर अधिक फोकस कर अधिक मत जमा कर लिए, लेकिन जिन क्षेत्रों में भाजपा का वर्चस्व रहता है वहां निर्दलीय के प्रभाव को कम आंकने की भूल कर दी। बेहद उतार चढ़ाव के बाद भाजपा अंतिम चरण में पिछड़ जाने से अपने मजबूत क्षेत्र में परास्त हो गई। हार के लिए ठीकरा भितरघातियों पर भी फोड़ा जाने लगा है।
कांग्रेस के लिए मुस्लिम वोट रहा फायदेमंद
डोईवाला। नगर पालिका डोईवाला में कांग्रेस के मजबूत मुस्लिम वोट बैंक ने भाजपा से नगर पालिका डोईवाला की कुर्सी छीनने में मदद की। डोईवाला के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में कांग्रेस के लिए जमकर वोटों की बारिश होने से जीत का मार्ग प्रशस्त कर दिया। तेलीवाला के बाद कुड़कावाला चायबाग ने कांग्रेस के पक्ष में मत देकर मुख्यमंत्री के क्षेत्र में कांग्रेस का परचम बुलंद कर दिया।