ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
मतदान की तिथि नजदीक आने पर जहां प्रत्याशियों ने चुनाव प्रचार तेज कर दिया है, वहीं घर-घर पर दस्तक देने के बावजूद वोटर की चुप्पी नहीं टूटने से प्रत्याशी बेचैन हो उठे हैं। ऐसे में उन्हें जीत-हार के गणित में माथा पच्ची करनी पड़ रही है।
इन चुनावों में प्रत्याशियों के लिए कार्यकर्ताओं का भी टोटा बना है। कई स्थानों पर प्रत्याशियों को झंडे और पोस्टर लगाने के लिए श्रमिकों का सहारा लेना पड़ रहा है। निकाय चुनाव में मतदान को एक सप्ताह से भी कम समय शेष रह गया है, बावजूद गली-मोहल्लों में चुनावी रौनक नजर नहीं आ रही है। मतदाताओं की खामोशी ने प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ा दी है। अधिकांश प्रत्याशी हो-हल्ला करने के बजाए घर-घर जाकर अपने पक्ष में माहौल तैयार करने में जुटे हैं। आलम यह है कि वोटर खुलकर किसी के पक्ष में कुछ नहीं बोल रहा है। ऐसे में नेताजी सहमे-सहमे नजर आ रहे हैं। प्रचार के नाम पर भी सड़कों पर इक्का-दुक्का वाहन ही नजर आ रहे हैं। अध्यक्ष से लेकर वॉर्ड मेंबरों तक के प्रत्याशी प्रचार के अन्य साधनों के बजाए डोर-टू-डोर संपर्क को ही तरजीह दे रहे हैं। सुबह के साथ ही देर रात को भी प्रत्याशियों को लोगों के घर में दस्तक देने से गुरेज नहीं है।