कर्णप्रयाग। चार दिवसीय शताब्दी समारोह रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पुरस्कार वितरण के साथ संपन्न हो गया है। इस दौरान गायत्री परिवार शांति कुंज हरिद्वार द्वारा शहीदों की आत्मा की शांति के लिए पिछले तीन दिन से किया जा रहा हवन आहुतियों के साथ संपन्न हो गया है।
सोमवार को शांति कुंज हरिद्वार की ओर से आयोजित 11 कुंडीय हवन में वार मेमोरियल शताब्दी समारोह समिति के सदस्यों, यूथ फाउंडेशन के युवाओं सहित 150 श्रद्धालुओं ने आहुतियां डाली। इसके बाद गढ़वाल राइफल की बैंड की धुन पर छात्रों ने नगर में शोभा यात्रा निकाली। सांस्कृतिक कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने रंगारंग प्रस्तुति दी। छात्रों के वीसी दरवान सिंह नेगी के शौर्य पर आधारित नाटक का मंचन भी किया।
इससे पूर्व समारोह में मुख्य अतिथि वीसी दरवान सिंह नेगी के बेटे कर्नल बलवीर सिंह नेगी (सेनि.) ने कहा कि समारोह समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम की धूम देश और विदेशों तक पहुंच चुकी है। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष हरीश पुजारी, महासचिव भुवन नौटियाल, प्रमुख राधा देवी, निवर्तमान पालिकाध्यक्ष सुभाष गैरोला, कर्नल डीएस बर्त्वाल (सेनि.), प्रधानाचार्य वीरपाल सिंह रावत, दीनदयाल रावत, गोविंद सिंह तोपाल, रवि दर्शन तोपाल, बीरेंद्र सिंह मिंगवाल मौजूद थे।
इन्हें किया सम्मानित
गढ़वाल स्काउट के हवलदार चंद्र मोहन सिंह, विनोद सिंह, सुरेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह, किशन सिंह, प्रदीप कुमार, अजय सिंह, खुशहाल सिंह, मेधावी छात्र शशांक थपलियाल, चेतन रस्तोगी, नसीम अंसारी, कपिल डिमरी, रेनू नेगी, गायत्री परिवार के दिनेश मैखुरी, सुनील शर्मा, गंभीर सिंह फर्स्वाण, चंडी प्रसाद रतूड़ी को शताब्दी गौरव नवाजा गया।
दरवान सिंह नेगी की युद्ध में भूमिका पर किया नाटक
कर्णप्रयाग। शताब्दी समारोह के मंच पर केंद्रीय गढ़वाल विवि के कलाकारों ने दरवान सिंह नेगी की युद्ध में भूमिका पर नाटक का मंचन किया।
विवि के संस्कृति एवं निष्पादन कला केंद्र के पूर्व निदेशक रहे डा. डीआर पुरोहित के नेतृत्व और अनूप गुसाईं, कुलीन जोशी के निर्देशन, डा. संजय पांडे के संगीत के साथ नाटक का मंचन किया गया। नाटक में दिखाया गया कि जर्मन लड़ाकों द्वारा अंग्रेजी हुकूमत की ओर से लड़ रहे भारतीय सैनिकों को मार रहे थे। ऐसे में दरवान सिंह ने युद्ध में मोर्चा लिया। दरवान सिंह की बहादुरी पर खुश होकर किंग जार्ज पंचम ने पांच दिसंबर 1914 को ही युद्ध के मैदान में उन्हें विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित होने के साथ पदोन्नति देते हुए सूबेदार भी बनाया। इस दौरान डा. डीआर पुरोहित को सम्मानित किया गया।