श्रीनगर। एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) उत्तराखंड के छात्रों के आंदोलन को 25 दिन हो गए है। छात्र जहां अपनी मांगों पर अड़े है वहीं एनआईटी प्रशासन छात्रों को कक्षाओं में लौटने के लिए मना नहीं पा रहा है। अब एनआईटी प्रशासन का कहना है कि अगर छात्र नहीं लौटे तो वर्तमान शैक्षणिक सत्र से वंचित कर दिए जाएंगे। एनआईटी प्रशासन ने सीनेट की बैठक में छात्रों के भविष्य के संबंध में निर्णय लेने की बात कही।
भक्तियाना में अस्थायी तौर पर चल रहे एनआईटी उत्तराखंड में पीएचडी, एमटेक व बीटेक के लगभग 980 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। स्थायी कैंपस के निर्माण होने तक सुविधाजनक स्थान में कैंपस शिफ्टिंग और सुविधाओं की मांग के लिए उक्त छात्र चार अक्तूबर से कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे हैं। एनआईटी के हॉस्टल में लगभग 600 छात्र-छात्राएं रहते हैं। वर्तमान में हॉस्टल में लगभग 36 छात्र-छात्राएं शेष रह गए हैं। बाकी अपने घरों को चले गए हैं। एनआईटी के स्थायी कैंपस के लिए जलेथा में भूमि चयनित की गई है। भूमि के दस्तावेज गत सितंबर माह में जिला प्रशासन ने शासन को भेज दिए थे। छात्रों के आंदोलन के बावजूद शासन में भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई गति नहीं पकड़ पाई है। इधर, एनआईटी प्रशासन ने छात्रों को नोटिस भेज जल्द नहीं लौटने पर वर्तमान शैक्षणिक सत्र से वंचित किए जाने का बात कही है।
>>>>>> आंदोलन को सुलझाने के लिए लगातार एनआईटी के अधिकारियों के साथ वार्ता चल रही है। स्थानीय स्तर की मांगों का समाधान करवाया जा रहा है। स्थायी कैंपस के लिए चिहिृृत भूमि का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। सुशील कुमार, डीएम पौड़ी