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द्रौपदी की लाज बचाने दौड़े श्रीकृष्ण

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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
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रायवाला। छिद्दरवाला में आयोजित पांडव नृत्य लीला के तीसरे दिन द्रौपदी चीरहरण का मंचन हुआ। इसके अलावा पासे के खेल मेें अपना सर्वस्व हारने के बाद पांडवों को 12 वर्ष के वनवास और एक वर्ष के अज्ञातवास के लिये चले गये।
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सिद्धेश्वर कला मंच धनारी उत्तरकाशी के कलाकारों ने शुक्रवार देर रात जागर शैली में पौराणिक गढ़ संस्कृति पर आधारित पांडव नृत्य लीला में द्रौपदी चीरहरण का मंचन किया गया। स्वयंवर में द्रौपदी को जीतकर पांडव कुंती माता के पास पहुंचे, जहां द्रौपदी को पांचों पांडवों की पत्नी बनकर रहने का निर्देश कुंती ने दिया। नृत्य शैली में कलाकारों ने पांडवों ने अपने लिए द्वारा कौरवों से अलग राज्य की मांग और दुर्योधन के इनकार करने बंजर पड़े खांडवप्रस्थ देने का मंचन किया। इसके अलावा इंद्र की उपासना के फलस्वरूप बंजर प्रदेश इंद्रप्रस्थ में तब्दील हुआ। इसके बाद इंद्रप्रस्थ में दुर्योधन का तालाब में गिरना और द्रौपदी का कटाक्ष का जीवंत मंचन किया गया। इसके बाद चौसर के खेल में पांडवों की पराजय और द्रौपदी चीरहरण का मंचन हुआ। द्रौपदी ने प्रकटी होईजा प्रभू मेरा, मेरी लाज हरिगेना, दर्शन दिव जाआवा प्रभू मेरी लाज बचै देना... की गुहार लगाई तो भगवान श्रीकृष्ण का दौड़ कर आने का मंचन किया गया। इस अवसर पर समिति अध्यक्ष हुक्म सिंह रावत, सुंदर सिंह कंडियाल, मुख्य अतिथि ग्राम प्रधान ध्यान सिंह असवाल, गिरीश पैन्यूली, कमल सिंह रावत, गुरदीप सिंह, प्रवीन बिष्ट आदि मौजूद रहे।
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