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भेदलू माछिना कु आंख, तैक देवी द्रौपदी व्यवै जाली

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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
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रायवाला। पौराणिक लोक संस्कृति पर आधारित पांडव लीला के दूसरे दिन द्रौपदी स्वंयवर का मंचन हुआ। गढ़वाल की जागर शैली में प्रस्तुत द्रौपदी स्वयंवर को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शकों की भीड़ रही। द्रौपदी स्वयंवर मंचन के दौरान भेदलू माछिना कु आंख, तैक देवी द्रौपदी ब्यवै जाली गीत पर दर्शकों ने खूब लुत्फ उठाया।
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छिद्दरवाला में पौराणिक वाद्य यंत्रों की थाप पर पांडव नृत्य लीला के दूसरे दिन अज्ञातवास के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के आग्रह पर पांडवों ने द्रौपदी स्वयंवर में भाग लिया। राजा द्रुपद की ओर से पुत्री द्रोपदी के लिए आयोजित स्वयंवर में क्षत्रपों ने धनुर्विद्या का प्रदर्शन किया। भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को स्वयंवर में ब्रह्मण वेशधारी पांडवों से द्रोपदी का सांकेतिक परिचय कराया। इसके बाद अर्जुन ने मछली की आंख भेदकर द्रोपदी स्वयंवर जीत लिया। इस अवसर पर आयोजक सर्व वरिष्ठ नागरिक एवं जन विकास समिति के अध्यक्ष हुक्म सिंह रावत, ग्राम प्रधान पूनम पोखरियाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य आशा कुड़ियाल, अनीता राणा, स्नेहलता भंडारी, रश्मी बगियाल, निर्मला बगियाल, निर्मला देवी, समा पंवार, भोला सिंह रावत, देवी प्रसाद अंथवाल, दिलबाग सिंह गिल, चंद्रमोहन सेमवाल, सुंदर सिंह कंडियाल आदि मौजूद रहे।
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