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कश्मीर के प्रति पूर्वाग्रहों को खत्म करने की जरुरत

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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर प्रांत के भारत में विलय दिवस के मौके पर गढ़वाल विवि में कश्मीर समस्या विविध आयाम विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र दिल्ली से आए रंजन चौहान ने जम्मू-कश्मीर से जुड़ी भ्रांतियों को दूर किया। उन्होंने कहा कि कुछ नेता और मीडिया कश्मीर को विवादित और अलगाववादी क्षेत्र के तौर पर पेश कर रहे हैं।
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शुक्रवार को राजनीति विज्ञान विभाग और जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र की संयुक्त पहल पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी के मुख्य वक्ता रंजन चौहान ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के बारे में भ्रांति है कि यहां के लोग अलगाववादी हैं। यह क्षेत्र विवादित है और विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है। श्च4द्घद्म ऐसा कुछ नहीं है। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। यह दस्तावेजों में दर्ज है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 और अनु. 35 ए का सबसे अधिक खामियाजा स्थानीय लोग झेल रहे हैं। काफी बड़ी जनसंख्या को कई पीढ़ी बाद भी वहां की नागरिकता नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि मीडिया लगभग 15 फीसदी हिस्से को फोकस कर हिंसाग्रस्त और अलगावग्रस्त क्षेत्र को दिखाता है। 85 फीसदी को स्थान नहीं दिया जाता है। यह क्षेत्र बहुत ही सुंदर है। चौहान ने आसिफा केस का जिक्र करते हुए कहा कि सभी ने बलात्कार के दोषियों को सजा देने की मांग की, लेकिन बच्चों की सुरक्षा के कानून पोक्सो को वहां लागू करने की बात नहीं की। कार्यक्रम में दिनेश उपमन्यु, प्रो. हिमांशु बौड़ाई, प्रो. एमएस सेमवाल आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डा. मनीष कुमार मिश्रा ने किया।
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