श्रीनगर। एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) मेें अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के परिजनों की ओर से प्रबंधन को अभी तक ई मेल का कोई रिस्पांस नहीं मिला है। प्रबंधन छात्रों के वापस कक्षाओं में लौटने का इंतजार कर रहा है। वहीं विभिन्न संगठनों ने सुविधाओं की आड़ में एनआईटी को मैदानी क्षेत्र में ले जाने की कोशिश का विरोध किया है।
एनआईटी में लगभग 980 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इनमें से लगभग 600 छात्र-छात्राएं हॉस्टल में रहते हैं, जबकि अन्य छात्र-छात्राएं परिसर से बाहर रहते हैं। स्थायी कैंपस निर्माण और अस्थायी तौर पर सुविधाजनक स्थान में शिफ्टिंग की मांग के लिए चार अक्तूबर से छात्र-छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार कर दिया था, जबकि विगत 23 अक्तूबर को उन्होंने विरोधस्वरूप हॉस्टल छोड़ दिए। वर्तमान में यहां लगभग 100 छात्र ही हॉस्टल में रह रहे हैं। संस्थान की ओर से छात्रों को ई-मेल के माध्यम से कक्षाओं में लौटने को कहा गया है, लेकिन अभी तक उनकी ओर से संस्थान को कोई जवाब नहीं मिला है।
इधर, छात्र संगठन एसएफआई के राजीव कांत एवं अतुल कांत ने बताया कि अस्थायी कैंपस में छात्रों को आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। छात्र थ्योरी के आधार पर पढ़ाई कर रहे हैं। प्लेसमेंट के लिए कंपनियां पहाड़ में नहीं आती हैं। उन्होंने पहाड़ में छात्रों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं जन उड़ान संगठन ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर एनआईटी प्रकरण में संस्थान के अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि छात्रों को उकसाने वाले अधिकारियों को चिह्नित किया जाना चाहिए।
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-जिस दिन छात्र कैंपस छोड़कर गए थे, उसी दिन कक्षाओं में लौटने का नोटिस दे दिया गया था। बिना बताए अनुपस्थित रहने या लगातार गैर हाजिर रहने पर संस्थान के नियमानुसार कार्रवाई होगी।
- जयदीप सिंह, सहायक कुलसचिव, एनआईटी, उत्तराखंड