गोपेश्वर। श्रीदेव सुमन विवि के गोपेश्वर कैंपस में उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यू-सेक) की ओर से कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में छात्र-छात्राओं को राज्य के विभिन्न जल स्रोतों का अंतरिक्ष तकनीकी के माध्यम से अध्ययन कर आंकड़े एकत्रित करने की जानकारी दी गई। साथ ही जल संसाधनों के प्रबंधन पर जोर दिया गया।
कॉलेज के सभागार में आयोजित कार्यशाला में पर्यावरणविद चंडी प्रसाद भट्ट ने पर्वतीय क्षेत्रों में जल संकट पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक पेयजल स्रोत दिन-प्रतिदिन विलुप्त होते जा रहे हैं। जल संसाधनों के प्रबंधन पर विशेष जोर देने की जरूरत है। यू-सेक के निदेशक एमपीएस बिष्ट ने प्रदेश सरकार के प्रयासों व जल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता से अवगत कराया। कार्यशाला की नोडल अधिकारी डा. आशा थपलियाल ने कहा कि यू-सेक अलकनंदा व भागीरथी समेत सात अन्य नदी घाटी के हिमनद, स्रोत और जल धाराओं का अंतरिक्ष तकनीकी के माध्यम से अध्ययन कर डाटाबेस तैयार कर रहा है। इसका उपयोग राज्य की जल नीति बनाने और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली क्षति के प्रभावों को दूर करने के लिए किया जाएगा। यू-सेक के वैैज्ञानिक शशांक लिंगवाल ने अंतरिक्ष तकनीकी को आम जनता तक पहुंचाने पर जोर दिया। इस मौके पर प्रभारी प्राचार्य डा. अरविंद अवस्थी, सुरेंद्र लिंगवाल, डा. नीलम रावत, डा. अरविंद भट्ट, पीजी कॉलेज के मीडिया कोआर्डिनेटर डा. दर्शन सिंह नेगी, आरएस मेहता, सौरभ डंगवाल, गौरव चमोली, मनीष रावत, विकास पैनुली और गोविंद नेगी आदि मौजूद थे।