ब्यूरो/अमर उजाला
साहिया/नागथात। दशहरा पर जौनसार बावर के मंदिरों में देव दर्शन को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं ने देव पालकियों के दर्शन कर सुख और शांति की कामना की। देर शाम तक मंदिरों में भक्तों की भीड़ जुटी रही।
शुक्रवार को कनबुआ, सिमोग, हनोल, बमराड़, मुंधोल, ठडियार, मेंद्रथ, लखवाड़, लक्सयार और बिसोई स्थित मंदिर से महासू देवता की देव पालकियों को लोगों के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए बाहर निकाला गया। लोगों ने चावल, अखरोट की बारिश कर देव स्तुति की। लोगों ने ईष्ट देवता के दर्शन कर मन्नत मांगी और भेंट चढ़ाई।
लक्सयार मंदिर में सुबह 11 बजे महासू देवता की पूजा-अर्चना की। इसके बाद देव पालकी को दर्शन के लिए गर्भगृह से बाहर निकाला गया। हर कोई देव पालकी को कंधा देने के लिए आतुर दिखा। 12 बजे देव पालकी को विधि विधान के साथ मंदिर के गृभ गृह में प्रवेश कराया गया। मंदिर में देव दर्शन को लोगों की होड़ लगी रही। इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष मुन्नालाल नौटियाल, राजेश्वर सिंह तोमर, रघुवीर सिंह तोमर, भजन सिंह तोमर, महावीर तोमर, गुमान सिंह तोमर आदि मौजूद रहे।
सिमोग गांव में सुबह सात बजे से ही देव दर्शन को लोगों के पहुंचने का क्रम शुरू हो गया जो देर शाम तक जारी रहा। इस मौके पर बजीवर कुंवर सिंह, मायाराम, प्रेमदत्त, रणवीर सिंह चौहान, सीताराम चौहान अतर सिंह, संतराम आदि मौजूद रहे।
कनबुआ गांव में भी देव पालकियों को दर्शन के लिए बाहर निकाला गया। लोगों ने देव पालकी के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। इस मौके पर शांति सिंह पंवार, विरेंद्र सिंह भंडारी, देव पुजारी दाता राम, खजान सिंह, धन सिंह, मुकेश सिंह, शंकर सिंह पंवार, मातवर पंवार, नरेश पंवार, अजब सिंह, बहादुर सिंह मौजूद रहे।
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भू लोक पर अवतरित परशुराम
साहिया। तीन माह तक पाताल में रहने के बाद शुक्रवार को परशुराम देवता धरती पर अवतरित हो गए। मान्यता है कि सावन की संक्रात के दिन परशुराम देवता तीन माह के लिए पाताल लोक में चले जाते हैं और फिर दशहरा के दिन दोबारा धरती पर अवतरित होते हैं। देव के भू लोक में अवतरित होने पर बोहरी गांव स्थित परशुराम देवता मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सैकड़ों की संख्या में लोगों ने देव दर्शन कर सुख और समृद्धि की कामना की। इस मौके पर मंदिर के पुजारी गुलाब सिंह चौहान भी मौजूद रहे।