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मानवाधिकार आयोग ने डीएम से रिपोर्ट तलब की

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। तीन साल से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे पशुलोक वासियों की उम्मीद जगी है। उत्तराखंड मानवाधिकार ने टिहरी के इन विस्थापितों की मांगों पर संज्ञान लेते हुए डीएम देहरादून, राजस्व विभाग और पंचायती राज विभाग को आदेश दिया है कि पूरी तैयारी के साथ अगली सुनवाई में आएं और अपना पक्ष रखें। आयोग ने कहा है कि विभाग और अफसर बताएं कि उक्त गांव को राजस्व ग्राम में अब तक क्यों नहीं शामिल किया गया।
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गौरतलब है कि वर्ष 2015 में दिनेश डोभाल ने आयोग में याचिका दाखिल की थी कि टिहरी के करीब 17 गांवों के लोग प्राकृतिक आपदा के बाद पशुलोक कॉलोनी में बस गए। कई वर्ष बीत जाने के बावजूद उन्हें किसी भी सरकारी विकास योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पूर्व में वीरपुर खुर्द से पशुलोक को संबद्ध किया गया था। अब हाल ही में पंचायती राज विभाग ने परिसीमन का शासनादेश जारी किया है। ऐसे में यदि शासन इस कॉलोनी को राजस्व ग्राम घोषित नहीं करता है तो यहां के लोग फिर से पांच साल के लिए अपने अधिकारों से वंचित हो जाएंगे। इस मामले को संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने संबद्ध विभागीय अफसरों सहित डीएम देहरादून को आदेश दिया है कि अगली तारीख पर पूरी तैयारी के साथ उपस्थित हों। इस आदेश के बाद टिहरी बांध विस्थापितों में आस जग गई है।
टिहरी बांध विस्थापित पुनर्वासित संयुक्त संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष प्रताप सिंह राणा, सचिव गंभीर गुलियाल, विजय बिष्ट सहित विस्थापित समन्वय विकास समिति, पशुलोक के अध्यक्ष हरि सिंह भंडारी एवं सचिव जगदंबा सेमवाल ने कहा है कि यह विस्थापितों के लिए दूरगामी निर्णय है।
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