ऋषिकेश। जो मुद्दे वर्ष 2001 में थे, वही अब भी हैं। उत्तराखंड की स्थापना हुए 18 वर्ष वर्ष होने को हैं। इसके बावजूद बुनियादी समस्याएं जस की तस हैं। इसी को लेकर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मुहिम छेड़ने के मूड में हैं। उन्होंने इसकी भूमिका भी तैयार कर ली है।
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने बृहस्पतिवार को एक प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन होना चाहिए, लेकिन प्रदेश की बुनियादी समस्याओं का समाधान भी जरूरी है। प्रदेश में स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार के लिए होने वाले पलायन में कई गुना बढ़ोत्तरी हुई है। पलायन आयोग की रिपोर्ट प्रदेश की गंभीर हो रही स्थिति का प्रमाण है। 734 गांव पूरी तरह से वीरान हो चुके हैं। 565 गांवों की जनसंख्या आधी हो गई है।
अन्य स्रोतों के मुताबिक घोस्ट विलेज की संख्या एक हजार से अधिक है। रिपोर्ट के अनुसर बीते एक दशक में लगभग एक लाख बीस हजार लोग गांव छोड़ चुके हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में जो लोग बचे हैं उनकी स्थिति दयनीय है। किशोर उपाध्याय ने कहा कि यदि पीएम मोदी ने मुलाकात का समय दिया तो ठीक है वरना प्रदर्शन किया जाएगा। इस मौके पर पूर्व जिलाध्यक्ष व एआईसीसी सदस्य जयेंद्र रमोला, नगर कार्यवाहक अध्यक्ष शिवमोहन मिश्रा, अरविंद जैन, मदनमोहन शर्मा, मुमताज हॉशिम, प्रदीप जैन, युकां विधानसभा अध्यक्ष अमरजीत धीमान, मनोज तिवारी आदि मौजूद रहे।
प्रमुख मांगें
-पर्यावरण रक्षा के एवज में केंद्र से 10000 करोड़ रुपए का ग्रीन बोनस तत्काल दिया जाय।
-राज्य को वन प्रदेश घोषित कर यहां के निवासियों को वनवासी का दर्जा दिया जाय।
-पंत नगर विश्वविधालय को केंद्रीय दर्जा दिया जाय।
-राज्य के दोनों मंडलों के पर्वतीय क्षेत्र में एम्स की स्थापना की जाय।
-राज्य के उच्च हिमालय क्षेत्र में नेहरू पर्वतोराहण संस्थान की तरह स्कीइंग और साहसिक खेल संस्थान की स्थापना की जाय।
-पर्वतीय क्षेत्र में जमीनों का बंदोबस्त करने के लिए जमीनों का डिजिटल सर्वेक्षण किया जाय।