ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। बदरीनाथ राजमार्ग को अतिक्रमण मुक्त करने और चौड़ीकरण के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अमल में लाना नेशनल हाईवे के लिए गले की फांस बन गया है। डिवीजन के पास बदरीनाथ नेशनल हाईवे का मानचित्र (नक्शा) ही नहीं है। लिहाजा, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड ने इसके लिए राजस्व विभाग से मदद मांगी है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) से 2014 के सितंबर माह में बदरीनाथ नेशनल हाईवे का ऋषिकेश के चंद्रभागा नदी ब्रिज से रुद्रप्रयाग तक का पैच लोक निर्माण विभाग नेशनल हाईवे डिवीजन श्रीनगर को हस्तांतरित हुआ था। लिहाजा इसके बाद से हाईवे के निर्माण व उसके रखरखाव का जिम्मा डिवीजन के पास है।
खासबात यह है कि मुनिकीरेती व अन्य क्षेत्रों में राजमार्ग के प्रस्तावित चौड़ीकरण के लिए अब विभागीय अधिकारी जमीन की नापजोख के लिए दर दर भटक रहे हैं। दलील है कि उन्हें बीआरओ ने हस्तांतरण प्रक्रिया के समय राजमार्ग का नक्शा ही नहीं दिया है, जिससे विभागीय भूमि कितनी है, यह तय कर पाना मुश्किल हो रहा है। मानचित्र के लिए डिवीजन बीआरओ के शिवालिक प्रोजेक्ट कार्यालय से बातचीत कर चुका है, मगर उन्होंने राजमार्ग का मानचित्र होने से साफ इनकार दिया है।
अब श्रीनगर डिवीजन ने हाईवे के मानचित्र के लिए राजस्व विभाग की शरण ली है। विभाग ने प्रशासन से हाईवे की भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए उनकी जमीन का सीमांकन करने के लिए कहा है। हालांकि, अभी उत्तराखंड इन्वेस्टर्स समिट के चलते इस कार्य में विलंब हो रहा है, मगर जल्द ही मुनिकीरेती व अन्य इलाकों में सीमांकन की कार्रवाई टिहरी प्रशासन शुरू कर सकता है।
मुनिकीरेती में पैदा होगा संकट
मुनिकीरेती क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर दुकानों के साथ ही घनी आबादी है। सूत्रों का दावा है कि हाईवे के दोनों लगभग 10-10 मीटर की जगह राजमार्ग के लिए ली जा सकती है। ऐसे में हाईवे की जड़ में बनी व्यावसायिक इमारतों और घरों को जमींदोज किया जा सकता है। हालांकि, अभी एनएच श्रीनगर डिवीजन के अधिकारियों ने भूमि को लेकर राजस्व विभाग पर बात डाली दी है। उनका कहना है कि राजस्व विभाग ही सीमांकन कर उन्हें भूमि उपलब्ध कराएगा।
क्या कहते हैं अधिकारी
बीआरओ ने जब नेशनल हाईवे विभाग को ट्रांसफर की थी, तो उस वक्त राजमार्ग का कोई नक्शा नहीं दिया गया था। अब राजमार्ग से अतिक्रमण को हटाया जाना है। ऐसे में प्रशासन से विभागीय भूमि के सीमांकन के लिए कहा गया है। इस बाबत लोकल प्रशासन से लगातार बातचीत चल रही है।
- मनोज सिंह बिष्ट, अधिशासी अभियंता, एनएच, श्रीनगर डिवीजन