कर्णप्रयाग। टिहरी के प्रतापनगर क्षेत्र की मिश्रवाण गांव की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन श्रीकृष्ण और रूकमणी के विवाह का वर्णन किया गया।
इससे पूर्व आचार्यों ने मां भद्रकाली, आकाशी भैरव और श्री हरि विष्णु की पूजा की। देव डोलियों ने श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया।
श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य बिहारी लाल सेमवाल ने श्री कृष्ण और रूकमणी के विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि जिस घर में नारी का सम्मान किया जाता है वहां देवता निवास करते हैं। गृहस्थ आश्रम तपोवन है, जिसमें सुख और दुखों के साथ ही प्रभु के नाम का स्मरण हो तो गृहस्थ आश्रम स्वर्ग बन जाता है। कार्यक्रम में आचार्य रविंद्र चमोली, डा. एमएम नवानी, डा. विजया नवानी, भद्रकाली के पुजारी रैपाल मिश्रवाण, मनोरमा डिमरी, दिक्केश्वरी नौटियाल, अंकित पैन्यूली, भगवान मिश्रवाण आदि मौजूद रहे। वहीं पौराणिक टटेश्वर महादेव मंदिर डिम्मर में वैदिक मंत्रोच्चारों और भव्य जलकलश यात्रा के साथ नवनिर्मित स्मृति द्वार के ऊपर हनुमान की मूर्ति को प्रतिस्थापित किया गया। इस मौके पर मंदिर के श्री महंत योगेशानंद महाराज, आचार्य सत्य प्रसाद खंडूड़ी, गणेश चंद्र खंडूड़ी, सुरेश डिमरी, शैलेंद्र प्रसाद डिमरी, प्रभुकांत डिमरी, प्रणवेंद्र प्रसाद डिमरी और महेश चंद्र सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।