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अभिभावकों का शोषण कर रहे पब्लिक स्कूल

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । उत्तराखंड अभिभावक संघर्ष महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी से मुलाकात की और इस दौरान उन्हें महासंघ की ओर से निजी विद्यालयों की मनमानी के विरुद्ध चलाए जा रहे आंदोलन से अवगत कराया। साथ ही उन्हें पब्लिक स्कूल प्रबंधन द्वारा अभिभावकों के आर्थिक शोषण व मानसिक प्रताड़ना के बाबत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड अभिभावक संघर्ष महासंघ बीते पांच वर्षों से विभिन्न मांगों को लेकर निजी विद्यालयों की मनमानी के विरुद्ध आंदोलनरत है। आरोप है कि उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना करते हुए सभी विद्यालयों ने महंगी पुस्तकें लगा दी गई हैं।
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उन्होंने बताया कि वार्षिक चार्ज के नाम पर पेरिओडिकल चार्ज, एग्जाम फीस के नाम पर डेवलपमेंट चार्ज, लाइब्रेरी शुल्क के नाम पर कंप्यूटर फीस व विभिन्न मदों में पब्लिक स्कूल प्रबंधन लगातार 5000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक अभिभावकों से जबरन वसूली कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष री-एडमिशन फीस का नाम बदलकर वार्षिक शुल्क कर दिया गया है। आरोप है कि पब्लिक स्कूल प्रबंधन की ओर से अभिभावकों को कानूनी नोटिस भेजकर धमका जा रहा है, जिससे बच्चे व अभिभावक मानसिक रूप से परेशान होने लगे हैं।
एसोसिएशन ने इस मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। बताया कि विभाग द्वारा पुख्ता सबूतों के बावजूद ऐसे पब्लिक स्कूलों को महज नोटिस देकर खानापूर्ति की जा रही है। उनके खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस मौके उन्होंने बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष से प्रकरण का संज्ञान लेने व कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस अवसर पर महासंघ के संयोजक रवि कुमार जैन, राजीव चौधरी, हरिराम वर्मा, नीरज गोयल आदि मौजूद थे।
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