कर्णप्रयाग। उत्तरी कड़ाकोट के दो गांव के ग्रामीण 56 दिनों से पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। शिकायत के बाद भी समस्या का निस्तारण नहीं किया गया। ग्रामीणों ने क्षतिग्रस्त पेयजल लाइन को वैकल्पिक तौर पर ठीक करने की कोशिश की, लेकिन पानी गांव तक नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में ग्रामीण एक से दो किमी की दूरी नापकर प्राकृतिक स्रोतों से पानी ढोने को मजबूर हैं।
15 जुलाई को कड़ाकोट क्षेत्र के कफारतीर और चिरखून सहित आसपास के गांवों की आठ किमी लंबी पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। तब से लाइन की मरम्मत तो दूर वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं हो पाई है। चिरखून के हरीश जोशी, सुशील कांति और कफारतीर के लखपत सिंह और यशपाल सिंह सहित कई लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत निर्माणाधीन मोटर मार्ग रैंस-भटियाणा के मलबे का सही जगह निस्तारण नहीं किया गया है। 15 जुलाई को भारी बारिश के कारण सड़क के मलबे से पेयजल लाइन कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गई। ग्रामीणों ने प्लास्टिक के पाइप के सहारे वैकल्पिक व्यवस्था करने के प्रयास किए, लेकिन लाइन अधिक क्षतिग्रस्त होने के चलते गांवों में पानी नहीं पहुंच पाया है। दोनों गांवों की करीब दो हजार से अधिक की आबादी 55 दिनों से पानी के लिए जूझ रही है। ग्रामीणों ने जल्द पेयजल लाइन की मरम्मत करने की मांग की। दूसरी ओर पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता प्रमोद गंगाड़ी का कहना है कि पेयजल लाइन सड़क के मलबे से क्षतिग्रस्त हुई होगी तो निरीक्षण कर संबंधित ठेकेदार को मरम्मत करने के निर्देश दिए जाएंगे।