श्रीनगर। श्रीनगर जल विद्युत परियोजना प्रभावितों की समस्याओं पर आंदोलन की रणनीति तय करने के लिए महापंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें
प्रभावितों की मांगों पर उचित कार्रवाई के लिए पांच दिन अल्टीमेटम सरकार को दिया गया। जबकि पक्षपात का आरोप लगाते हुए इस दौरान जिलाधिकारी टिहरी के निलंबन की भी मांग की गई।
बुधवार को चौरास पट्टी के मंगसू में आयोजित महापंचायत में विभिन्न संगठनों ने प्रतिभाग किया। महापंचायत में मातृ सदन के शिवानंद स्वामी ने कहा कि सरकार को पांच दिन के अंदर प्रभावितों की न्यायोचित मांगों पर निर्णय लेना चाहिए। बड़ी-बड़ी कंपनियां जनता को प्रलोभन देकर उनकी संपत्तियों पर कब्जा कर लेती हैं। ग्रामीणों के संसाधन और अधिकारों को नष्ट किया जा रहा है। जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि प्रभावितों को मुआवजा मिलना चाहिए, लेकिन गंगा की अविरलता और हिमालय की हरियाली को लौटाने के लिए सभी को आगे आना होगा। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि वह पहले से परियोजना के लिए स्पष्ट नीति बनाने के पक्षधर रहे हैं, लेकिन सिस्टम ने उनकी बात नहीं सुनी। उत्तराखंड के जल और वन पर यहां के निवासियों के अधिकार होने चाहिए। उत्तराखंड के निवासियों को प्रत्येक माह एक गैस सिलेंडर और 100 यूनिट बिजली मुफ्त मिलनी चाहिए। जब तक प्रभावितों की समस्याओं का निराकरण नहीं होता, तब तक लोग बिजली-पानी का बिल नहीं दे। महापंचायत का संचालन हिमालय बचाओ आंदोलन के समीर रतूड़ी ने किया। इस अवसर पर कांग्रेस नेता धीरेंद्र प्रताप, अनशनकारी दौलत कुंवर, गिरीश बहुगुणा व ओम प्रकाश थपलियाल, पुष्पा जोशी, अरुण खुगशाल, सुनीता पांडे, अनिल स्वामी और विभोर बहुगुणा आदि मौजूद थे।