श्रीनगर। शहर से पानी के डिजीटल मीटर हटाने और बिलों में संशोधन की मांग के लिए कांग्रेस और अन्य सामाजिक संगठनों ने रैली निकालकर प्रदर्शन किया। साथ ही उन्होंने जल संस्थान दफ्तर का घेराव किया।
शनिवार को कांग्रेस, प्रगतिशील जनमंच और श्रीनगर बचाओ संघर्ष समिति ने बाजार क्षेत्र में जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर गुस्से का इजहार किया। प्रदर्शनकारी जुलूस की शक्ल में जल संस्थान दफ्तर पहुंचे और मीटर हटाने की मांग को लेकर कार्यालय का घेराव किया। उन्होंने कहा कि पूरे उत्तराखंड में सबसे पहले श्रीनगर में ही पानी के मीटर लगाए गए हैं, जबकि श्रीनगर क्षेत्र अलकनंदा नदी किनारे बसा है। यहां पानी की कोई कमी नहीं है। सरकार मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की नियुक्ति, आईटीआई का मलबा, पार्किंग की व्यवस्था, एनआईटी के स्थायी कैंपस का निर्माण व श्रीनगर देव सुमन का एफिलिएटिंग कैंपस तो बना नहीं पा रही है, लेकिन पानी के मीटर लगाकर जनता को परेशान कर रही है। प्रदर्शनकारियों में पीसीसी सदस्य प्रदीप तिवाड़ी, महिला कांगे्रस जिलाध्यक्ष राजेश्वरी रावत, नगर कांग्रेस अध्यक्ष वीरेंद्र नेगी, जिला महामंत्री गणपति भट्ट, विजय रावल, प्रजम के अध्यक्ष अनिल स्वामी, श्रीनगर बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रेमदत्त नौटियाल, हीरालाल जैन और मुकेश अग्रवाल आदि शामिल थे।
मीटर लगाने से आ रहा पानी का बिल ज्यादा
श्रीनगर। नगर और आसपास के क्षेत्रों में जल संस्थान की ओर लगाए गए पानी के मीटरों पर घमासान मचा हुआ है। कुछ उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिल ज्यादा आ रहे हैं, वहीं जल संस्थान का कहना है कि 90 फीसदी उपभोक्ता मीटर लगने से संतुष्ट हैं।
कांग्रेस शासनकाल के दौरान वर्ष 2014 में एडीबी वित्त पोषित योजना के जल संस्थान को उत्तराखंड इमरजेंसी एसेसमेंट कार्यक्रम (यूइएपी) के तहत श्रीनगर क्षेत्र में काम कराने की मंजूरी मिली। इसी कार्यक्रम में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में गढ़वाल मंडल में श्रीनगर और कुमाऊं मंडल में नैनीताल में पानी के डिजीटल मीटर लगाने की भी स्वीकृति मिली। 31 मार्च 2017 को छह हजार 245 मीटर लगाने के टेंडर स्वीकृत हो गए, जिसके बाद श्रीनगर, डांग और श्रीकोट में लगने शुरू हुए। अब तक जल संस्थान छह हजार से अधिक मीटर लगा चुका है। पिछले दो माह से संस्थान ने मीटर के आधार पर बिल लेने शुरू कर दिए, जिससे बवाल मचा हुआ है।
ऐसी है नई व्यवस्था
जल संस्थान की ओर से प्रत्येक उपभोक्ता के मीटर की यूनिक आईडी बनाई गई है। मीटर रीडर जीपीएस से प्रत्येक मीटर की रीडिंग ले लेता है। मीटर और मीटर रीडर रेडियो फ्रिक्वेंसी पर कार्य करते हैं। वर्तमान में शहरी घरेलू कनेक्शन के लिए न्यूनतम 157 रुपये और ग्रामीण क्षेत्र के लिए 107 रुपये निर्धारित किया गया है। इसमें उपभोक्ता 10 हजार लीटर तक पानी खर्च कर सकता है। इसके बाद प्रति एक हजार लीटर पर 10 रुपये बिल देना पड़ेगा।
90 फीसदी से अधिक उपभोक्ता बिल से संतुष्ट हैं। ऐसा देखा गया है कि जिन घरों में किरायेदार अधिक हैं, वहां ज्यादा बिल आया है। जनता की मांग पर ही मीटर लगवाए गए हैं। जब मीटर से पानी गुजरेगा, तभी रीडिंग आएगी। हवा से मीटर चलने की बात अफवाह है। यदि कोई गड़बड़ी होगी, तो उन बिलों को दिखवाया जाएगा। -कृष्णकांत, सहायक अभियंता जल संस्थान श्रीनगर