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टिहरी विस्थापित:आसमान से गिरे, खजूर पर अटके

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। टिहरी विस्थापित क्षेत्र आम बाग, निर्मल ब्लॉक और श्यामपुर के लक्कड़घाट क्षेत्र की स्थिति राज्य सरकार की विस्थापन नीति में मौजूदा खामियों के चलते आसमान से गिरे खजूर पर अटके जैसी हो गई है। उक्त इलाके पिछले विस्थापन के समय से भूमिधरी का अधिकार व राजस्व ग्राम की मांग उठाते आ रहे हैं, मगर उन्हें तब से आज तक की सरकारों से ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पाई हैं।
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टिहरी बांध में अपने पैतृक घर, गांव, खेत, खलिहानों को खोने वाले टिहरी विस्थापित विस्थापन के 18 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। सरकार ने विस्थापन के तौर पर उन्हें भूमि तो आवंटित की, मगर भूमिधरी का अधिकार उन्हें आज भी प्राप्त नहीं हो पाया है। बिना भूमिधरी अधिकार मिले उक्त टिहरी के विस्थापित करीब दर्जनभर गांवों के हजारों परिवार अभी भी सड़क संपर्क, सीवर सिस्टम, पथ प्रकाश और वर्षाजल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं।
निर्मल ब्लॉक-बी क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता जीएस बिष्ट, गंभीर सिंह गुलियाल ने बताया कि टिहरी विस्थापित उन्हें आवंटित भूमि एनडी तिवारी से लेकर त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार तक अनगिनत बार अफसरों से लेकर विधायक, मंत्रियों और मुखिया तक गुहार लगा चुके हैं, मगर कोई सुनने को तैयार नहीं है। भूमिधरी का अधिकार नहीं मिलने से विस्थापित क्षेत्र के लोगों को सरकार से मिलने वाली सुविधाएं तो मिल नहीं पा रही हैं, उन्हें अपने करोड़ों की लागत की भूमि व भवनों के बावजूद उनका स्वामित्व व बैंक ऋण तक नहीं मिल पा रहा है।
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न निकाय और न ग्रामसभा में हुए शामिल
तीर्थनगरी के टिहरी विस्थापित क्षेत्र को 18 वर्ष के बाद भी अभी तक पृथक इकाई घोषित नहीं किया गया। इसे नगर निगम ऋषिकेश और वीरपुरखुर्द व खदरी श्यामपुर ग्रामसभा में भी शामिल नहीं किया गया है। लिहाजा इस इलाके में रह रहे लोगों को भूमि, भवनों के एवज में स्वरोजगार के लिए बैंक ऋण जैसी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

महज वोट बैंक बनकर रह गए टिहरी विस्थापित
तीर्थनगरी के टिहरी विस्थापित परिवार विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए अब तक महज वोट बैंक बनकर रह गए हैं। उन्हें हर बार चुनाव के समय भूमिधरी का अधिकार देने का भरोसा तो दिया जाता है, मगर सत्ता में आने के बाद दल व उसके प्रतिनिधि टिहरी बांध विस्थापितों को भूल जाते हैं।

कोट्स
टिहरी विस्थापितों की मांग जायज है। इस दिशा में मेरे स्तर से गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। पिछली सरकार के समय इस मुद्दे पर बांध विस्थापितों को बहलाया गया, मगर इस बार उनके हकहकूक के लिए सरकार के स्तर पर गंभीरता से प्रयास हो रहे हैं, जल्द इस दिशा में सफलता मिलने की पूरी उम्मीद है।
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- प्रेमचंद अग्रवाल, क्षेत्रीय विधायक व विधानसभा अध्यक्ष।
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