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सड़क बंद, 4 घंटे तक जाम में रहा सैनिक का पार्थिव शरीर

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थराली। नागालैंड में तैनात असम राइफल के जवान दलबीर सिंह रावत का पार्थिव शरीर रास्ते बंद होने के कारण चार घंटे तक भूस्खलन क्षेत्र में फंसा रहा। यहां प्राणमति में मलबा आने से रास्ता बंद मिला तो ग्रामीण पार्थिव शरीर कंधे पर रखकर मलबे के ऊपर से ही गुजरे और गांव पहुंचे। इसके बाद पैतृक घाट सेराबगड़ में उनका अंतिम संस्कार किया गया। सेना के जवानों ने सैनिक को अंतिम सलामी दी।
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20 अगस्त को रूईसाण निवासी और असम राइफल के जवान दलबीर सिंह रावत (34) की बीमारी के कारण नागालैंड में मौत हो गई थी। उनका पार्थिव शरीर शुक्रवार सुबह साढ़े दस बजे थराली पहुंचा लेकिन थराली से आगे प्राणमति में मलबा आने से सड़क बंद थी। इस दौरान ग्रामीणों ने लोनिवि से जल्द सड़क खोलने की मांग की, लेकिन सड़क नहीं खुल पाई। तक ग्रामीण खिलाफ सिंह, प्रताप सिंह, भगवत सिंह, बख्तावर सिंह, केशर सिंह आदि ने दोपहर करीब ढाई बजे शव कंधे पर रखकर पैदल ही भूस्खलन क्षेत्र को पार किया। इसके बाद अन्य वाहन से शव रूईसाण ले जाया गया। शव देखते ही दलबीर की मां ऊखा देवी का रो पड़ी जबकि जबकि पिता खिलाफ सिंह सदमे में हैं। दलबीर अपने पीछे पत्नी शशि रावत, 12 वर्षीय बेटी रोशनी और 14 वर्षीय बेटा अजय रावत छोड़ गए हैं। अंतिम दर्शनों के बाद सैनिक का अंतिम संस्कार सेराबगड़ घाट में सैन्य सम्मान के साथ किया गया। लोनिवि के अवर अभियंता अमरदीप सिंह ने बताया कि सुबह से लगातार बारिश होने के चलते सड़क खोलने में दिक्कतें हो रही हैं। शाम चार बजे करीब सड़क को यातायात के लिए खोल दिया गया। इस दौरान नायब तहसीलदार ओमबीर सिंह, राजस्व उपिनरीक्षक राजकुमार, ग्राम प्रधान सुदर्शन सिंह आदि मौजूद रहे।
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