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बहनों को अंतिम यात्रा में खींच लाया भाई का प्यार

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
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रक्षाबंधन से ठीक पहले गंगानगर निवासी कुंवर सिंह रावत के इकलौते पुत्र लांसनायक प्रदीप सिंह रावत की शहादत से जहां तीर्थनगरी आहत है, वहीं प्रदीप की बहनें इकलौते भाई की शहादत से भीतर तक टूट चुकी हैं। भाई के प्रति स्नेह के चलते ही जांबाज प्रदीप की तीनों बहनें मंगलवार को तमाम सामाजिक व धार्मिक वर्जनाओं को तोड़कर नायक की अंतिम यात्रा में न सिर्फ शामिल हुईं, बल्कि वह भाई को अंतिम विदाई देने घर से श्मशान घाट तक भी पहुंचीं।
घर के इकलौते बेटे लांसनायक प्रदीप रावत की बहनें रक्षाबंधन के चलते जहां भाई को राखियां भेजने की तैयारी कर ही रही थीं, कि अचानक उनकी शहादत की खबर आ गई। शहीद प्रदीप की बड़ी बहन अनीता विवाहित है, जबकि दो अन्य विनीता और सुषमा उनसे छोटी हैं। तीन दिनों से भाई के शहीद होने से गमजदा बहनों की जहां उनका खयाल आते ही आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। वहीं मंगलवार को जांबाज प्रदीप की अंतिम यात्रा के मौके पर भाई के प्रति बहनों के अटूट प्रेम के आगे अंतिम यात्रा में महिलाओं के शामिल होने की सामाजिक व धार्मिक वर्जनाएं कहीं नहीं टिकी। तीनों बहनें भाई को अंतिम विदाई देने घर से कारवां के साथ आगे बढ़ती चली गईं और श्मशान तक जा पहुंची।
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पूरी यात्रा के दौरान नायक की तीनों बहनें बदहवास स्थिति में नजर आईं। नायक प्रदीप की सबसे छोटी बहन सुषमा के हाथों से तो बड़े भाई की तस्वीर को कोई भी अलग नहीं कर पाया। श्मशान से वापस घर लौटने के बाद तक भी भाई की तस्वीर वह कभी सीने से लगाती तो कभी उसे नम आंखों से निहारती रही। बहनों की आंसुओं से बहते आंसुओं के सैलाब को देखकर उनके साथ चल रहे लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पाए।
शहीदों के लिए महिलाओं ने भी तोड़े रीति रिवाज
हाल में तीर्थनगरी निवासी तीन युवा जांबाज आतंकियों से लोहा लेते हुए जम्मू कश्मीर में वीरगति को प्राप्त हो चुके हैं। इन शहीदों की अंतिम यात्रा में जहां शहर और गांव से जन सैलाब उमड़ा, वहीं इस सैलाब में शहीदों के घर व नाते रिश्तेदारी की महिलाओं के अलावा समाज के अन्य वर्गों की महिलाएं भी सामाजिक व धार्मिक प्रतिबंधों को तोड़कर खासी संख्या में शामिल हुई। इस दौरान कई महिलाओं का कहना था कि देश की रक्षा में वीरगति को प्राप्त होने वाले सैनिकों के सम्मान में किसी तरह की सामाजिक व धार्मिक वर्जनाएं आड़े नहीं आ सकती और न ही आनी चाहिए।
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पिता चूमते रहे जांबाज बेटे की वर्दी
शहीद प्रदीप रावत की अंतिम यात्रा से पूर्व घर में उनके पार्थिव शरीर के समीप टंगी जांबाज की वर्दी पर जब-जब भी शहीद के पिता कुंवर सिंह रावत की निगाह पड़ती वह फख्र से उसे कभी सीने से लगाते दिखे और कभी चूमते रहे।
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