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भोलों के जीवन से खिलवाड़ कर रही सरकार

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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
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राज्य सरकार और पौड़ी प्रशासन कांवड़ यात्रा में प्राचीन नीलकंठ धाम के दर्शन को आने वाले लाखों श्रद्धालु कांवड़ियों के जीवन से खिलवाड़ कर रहा है। प्रशासन ने मेले में आ रहे श्रद्धालुओं के पंजीकरण के लिए फोटोमीट्रिक रजिस्ट्रेशन तो दूर पांच साल से किए जा रहे मैनुअली पंजीकरण की व्यवस्था को इस साल महज औपचारिक कर दिया है। लिहाजा नीलकंठ धाम के दर्शन को पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का मैनुअली रजिस्ट्रेशन भी नहीं हो पा रहा है। ऐसे में वर्षाकाल में आपदा की दृष्टि से अतिसंवेदनशील क्षेत्र में उमड़ रहे लाखों कांवड़ियों के साथ कोई अप्रिय घटना घटती है तो सरकार व प्रशासन के पास इसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिल पाएगा। यह स्थिति तब है जबकि यह श्रद्धालुओं की आमद के लिहाज से उत्तराखंड की सबसे बड़ी यात्रा है।
गौरतलब है कि वर्ष 2013 की केदारनाथ जलप्रलय के बाद राज्य सरकार व पौड़ी प्रशासन ने उसी साल श्रावण मास की कांवड़ यात्रा में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए मैनुअली पंजीकरण की व्यवस्था शुरू की थी। जो गत वर्ष तक नियमित चलती रही। यात्रा में आने वाले प्रत्येक यात्री का नाम, पता, दूरभाष नंबर आदि रिकॉर्ड राजस्व व जिला पंचायत के पास रखा जाता था। इस साल कांवड़ यात्रा में पंजीकरण के लिए काउंटर तो खोले गए हैं, मगर इनमें तैनात कर्मचारी हर रोज नीलकंठ धाम में जुट रहे शिवभक्त कांवड़ियों को प्रोपर रजिस्ट्रेशन नहीं कर रहे हैं।
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अमर उजाला की टीम ने लिया जायजा
सोमवार को कांवड़ यात्रा की कवरेज में जुटी ‘अमर उजाला’ टीम को विभिन्न स्थानों पर लगाए गए पंजीकरण शिविरों पर इस तरह की खामियां देखने को मिली, जहां पर यात्रियों का रेला नीलकंठ धाम की ओर बढ़ रहा था, मगर उन्हें रोकने और पंजीकरण कराने वाला कोई नहीं था। यहां तक कि टीम को मौके पर तैनात कर्मचारी आराम फरमाते मिले। मजेदार बात यह है कि बीते पांच वर्षों में राज्य सरकार उत्तराखंड की श्रद्धालुओं की सबसे अधिक संख्या वाली इस यात्रा में आज तक फोटोमीट्रिक रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था नहीं कर पाई है, जबकि मैनुअली पंजीकरण को लेकर इस साल और लापरवाही बरती जा रही है।

कोट्स
गरुड़चट्टी व नीलकंठ पैदल मार्ग पर बैराज-कांडी एनएच के समीप मैनुअल पंजीकरण की सुविधा शुरू की गई है। यहां पर पहुंचने वाले कांवड़ियों का मैनुअल पंजीकरण किया जा रहा है।
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किशन सिंह नेगी, एसडीएम, यमकेश्वर।

नीलकंठ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के मैनुअल पंजीकरण की व्यवस्था के लिए कर्मचारियों को तैनात किया गया है। यदि इन केंद्रों में स्टाफ पंजीकरण नहीं कर रहा है तो यह गंभीर मसला है। इसे दिखवाया जाएगा, और यदि पंजीकरण नहीं हो रहे हैं इसे शुरू करवाया जाएगा।
सुशील कुमार, डीएम पौड़ी।
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