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असहयोग आंदोलन के मुद्दे पर शिक्षक और विभाग में रार

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श्रीनगर। उत्तराखंड प्राथमिक शिक्षक संगठन के असहयोग आंदोलन के मुद्दे पर टिहरी जिले में प्राथमिक शिक्षक और शिक्षा विभाग आमने-सामने आ गया है। विभाग ने व्हाट्स एप व एसएमएस से सूचना न भेजने पर वेतन रोकने की चेतावनी दी है।
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प्राथमिक शिक्षक संघ प्रदेशभर में छह बिंदुओं पर विगत 23 मई से असहयोग आंदोलन चला रहा है। इसमें व्हाट्स एप के माध्यम से सूचना का आदान-प्रदान न करना, एमडीएम की दैनिक जानकारी एसएमएस न करना, मासिक परीक्षा के प्रश्न पत्रों को व्हाट्सएप पर स्वीकार न करने, ऑन लाइन फीडिंग न करना आदि शामिल है।
आंदोलन की वजह से विभागीय कार्यों में व्यवधान होने पर जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) टिहरी 24 जुलाई को सभी उप शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि सोशल मीडिया के माध्यम से सूचनाएं न भेजने पर संबंधित विद्यालय/शिक्षक की जिम्मेदारी तय की जाएगी। एमडीएम की सूचना एसएमएस न करने पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना मानी जाएगी। यदि शिक्षक कार्यों में व्यवधान करते हैं, तो वेतन रोकने की कार्रवाई की जाएगी।
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डीईओ के इस पत्र से प्राथमिक शिक्षक भड़क गए हैं। प्राथमिक शिक्षक संगठन की जिला मंत्री प्रीतम सिंह का कहना है कि पूरे प्रदेश में आंदोलन चल रहा है, लेकिन इस तरह का आदेश सिर्फ टिहरी में निकला है। उन्होंने कहा कि सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए विद्यालयों में आधुनिक संचार सुविधा नहीं दी गई है। यदि सुप्रीम कोर्ट ने एमडीएम (मध्याह्न भोजन) के सूचना एसएमएस करने के आदेश दिए हैं, तो उस आदेश को विभाग सार्वजनिक करे। विभाग शिक्षकों को कोर्ट के आदेश के नाम पर डरा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि विभाग वेतन रोकने पर कार्रवाई करती है, असहयोग आंदोलन के साथ ही अन्य आंदोलन छेड़ा जाएगा। डीईओ बेसिक एसएस बिष्ट का कहना है कि शिक्षक संगठन का अभी मुझे पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। पत्र मिलने के बाद ही कुछ बोल पाऊंगा।
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