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ट्रांसपोर्ट एजेंसी ने निजी वाहन को भेजा था बुकिंग में

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श्रीनगर। गढ़वाल विवि में वाहन बिल मामले में नया मोड़ आ गया है। ट्रांसपोर्ट एजेंसी ने जिस वाहन नंबर के आधार पर बिल विवि को भेजा। वह किसी व्यक्ति का निजी वाहन है। नियमानुसार निजी वाहन को बुक नहीं किया जा सकता। हालांकि ट्रांसपोर्ट एजेंसी का कहना है कि काम अधिक होने पर वह निजी वाहनों को भी हायर करते हैं। वहीं विवि प्रशासन मामले में कुछ भी कहने से बच रहा है। विवि प्रशासन का कहना है कि विवि के मानकों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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विवि प्रशासन ने कुछ दिन पूर्व एक ट्रांसपोर्ट एजेंसी को मेरठ से श्रीनगर टैक्सी बुकिंग (आना-जाना, 7 दिन ठहरना) 26 हजार 670 रुपये का भुगतान किया था। बिल विवि के कार्यपरिषद के एक सदस्य ने क्लेम किया था। सदस्य विभिन्न अनियमितताओं के लिए कार्य परिषद की ओर से गठित टीम में शामिल थे। टीम 20 जून से 26 जून तक विवि में रही थी, जिस वाहन को उक्त सदस्य द्वारा बुक किया गया था वह आरटीओ के वाहन एप से पुष्टि करने पर मोटर कार (निजी वाहन) में पंजीकृत हैं, जबकि टैक्सी वाहन मोटर कैब में पंजीकृत किए जाते हैं। नियमानुसार निजी वाहनों का व्यावसायिक प्रयोग नहीं किया जा सकता। ऐसा किए जाने पर यह टैक्सी चोरी का मामला बनता है। वहीं मामला विवि के कार्य परिषद के सदस्य से जुड़े होने से गढ़वाल विवि प्रशासन इस संबंध में कुछ भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। विवि प्रशासन का कहना है कि ट्रांसपोर्ट एजेंसी की ओर से उक्त वाहन के नंबर का बिल दिया गया था। वाहन यदि निजी है, तो वह ट्रांसपोर्ट एजेंसी की गलती है। वहीं ट्रांसपोर्ट एजेंसी का कहना है कि काम अधिक होने पर वह निजी वाहनों को हायर कर लेते हैं। वित्त अधिकारी प्रो. एनएस पंवार का कहना है कि उक्त मामले में विवि के मानकों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

सात दिन तक वाहन विवि में रोके जाने पर सवाल
श्रीनगर। विवि प्रशासन का कहना है कि जिस ट्रांसपोर्ट एजेंसी से वाहन हायर किया गया था। उस एजेंसी के नियम-कायदे के अनुसार प्रतिदिन 200 किमी का भाड़ा दिया जाना अनिवार्य था। वाहन सात दिन तक विवि मे रहा इसलिए प्रतिदिन 200 किमी के हिसाब से भुगतान किया गया है। विवि प्रशासन का कहना है कि यह नियम सभी ट्रांसपोर्ट एजेंसियां फोलो करती हैं। कर्मचारियों ने वाहन को सात दिन तक विवि में ही पार्क किए जाने पर सवाल उठाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वाहन को वापस भेज दिया जाता, तो विवि का पैंसा बच जाता।
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