ब्यूरो/अमर उजाला, त्यूनी।
शिक्षा निदेशक आरके कुंवर के निर्देशों के 23 दिन बाद भी विभागीय अधिकारी हरकत में नहीं आए हैं। कालसी प्रखंड में अब भी 65 ऐसे प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल हैं, जिनमें कक्षाओं का संचालन जर्जर भवनों में चल रहा है। छात्रों की नजरें पढ़ाई के दौरान किताबों से ज्यादा छत पर टिकी रहती हैं। ऐसे में साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभागीय अधिकारी सरकारी आदेश के प्रति कितने गंभीर हैं।
अभिभावकों का कहना है कि जर्जर भवनों की सुध लेने से पूर्व विभाग को किसी हादसे का इंतजार है। हर साल विभाग बरसात शुरू होने से पहले शिक्षकों को जर्जर और असुरक्षित भवनों में कक्षाओं का संचालन न करने के निर्देश देता है, लेकिन सच्चाई यह है कि बीते पांच सालों से जर्जर भवनों में ही कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। मालूम हो कि एक जुलाई को विभाग ने समस्त खंड शिक्षाधिकारियों को स्कूलों को जर्जर भवनों में संचालित नहीं करने के निर्देश दिए थे। लेकिन क्षेत्र में अब भी 65 से अधिक जर्जर भवनों में स्कूल संचालित हो रहे हैं।
अभिभावक प्रदीप कमार, विजयपाल सिंह, रामलाल आदि का कहना कि बारिश में कक्षाएं टपकने लगती हैं। हर बार विभाग बजट की कमी बता भवनों की मरम्मत से पल्ला झाड़ लेता है। इसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ता है।
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इन स्कूलों का संचालन जर्जर भवनों में
मरम्मत के अभाव में चकराता प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय सुनीर, ऐथाण, किस्तूल, दोइरा पुड़िया, गड़सार, त्यूनी, मयरावना, गोरछा, जूनियर हाईस्कूल हनोल और कालसी प्रखंड अंतर्गत प्राइमरी स्कूल अलसी, बड़नू, दातनू, मलेथा, मसराड़, चापनू, पंजिया, व्यास भूड़, कालसी, धोईरा, मथेेऊ, थैना और जूनियर हाईस्कूल बसाया, बैसोगीलानी, समेत 65 स्कूलों की हालत खस्ता बनी हुई है।
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सभी शिक्षकों को जर्जर भवनों में नहीं बैठने के निर्देश दिए गए हैं। मामले में संबंधित उपखंड शिक्षाधिकारियों का सप्ष्टीकरण तलब किया जाएगा।
- हेमलता भट्ट, जिला शिक्षाधिकारी (बेसिक)