ब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकेश।
नमामि गंगे योजना के अंतर्गत यमकेश्वर के फूलचट्टी स्थित गंगा व हेंवल नदी के संगम पर पांच करोड़ की लागत से दो घाटों का निर्माण तो किया गया, मगर निर्माण एजेंसी ने घाट तक पहुंचने वाले संपर्क मार्ग को नहीं बनाया, जिसके चलते यहां स्थापित स्नान घाट व श्मशान घाट तक आने-जाने वाले लोगों को आवागमन में दुश्वारियों का सामना करना पड़ेगा। गंगा की स्वच्छता के उद्देश्य से संचालित नमामि गंगे योजना के अंतर्गत फूलचट्टी स्थित गंगा व हेंवल नदी के संगम पर निर्माण एजेंसी वेबकॉस ने करीब ढाई करोड़ की लागत से स्नानघाट और लगभग इतनी ही लागत का श्मशान घाट का निर्माण किया है।
यहां निर्मित स्नान घाट से स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ ही देश-दुनिया से प्राचीन नीलकंठ धाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को भी गंगा में डुबकी लगाने में सुविधा मिलेगी। इसके अलावा संगम के समय श्मशानघाट का निर्माण भी किया गया है, जिसमें यमकेश्वर व द्वारीखाल प्रखंड के लगभग चार सौ गांवों के लोगों की सुविधा के लिए शवदाह के लिए श्मशानघाट का निर्माण भी किया गया है। योजना पर पांच करोड़ की लागत आई है, बावजूद इसके संगम तक पहुंचने वाला संपर्क मार्ग अत्यधिक खराब है। यहां तक लक्ष्मणझूला-कांडी नेशनल हाईवे से करीब 900 मीटर का कच्चा मार्ग है, संबंधित एजेंसी ने उक्त मार्ग की मरम्मत की सुध नहीं ली।
उक्त मार्ग के निर्माण से न सिर्फ इन घाटों तक आने-जाने वाले लोगों को आवागमन की सुविधा मिलनी थी, बल्कि समीपवर्ती फूलचट्टी, उमरीसैंण आदि गांवों के लोगों को भी सुविधा मिलती। सामाजिक कार्यकर्ता सत्यपाल सिंह राणा, फूलचट्टी गांव निवासी देवेंद्र सिंह नेगी, रविंद्र सिंह, दिगंबर सिंह, श्याम सिंह, उमरीसैंण निवासी कुलदीप राणा ने बताया कि संगम तक जाने वाले एकमात्र मार्ग की मरम्मत की जानी चाहिए थी। उन्होंने नमामि गंगे योजना के अंतर्गत किए गए घाट निर्माण कार्य पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि सरकार को उक्त योजना के तकनीकी व व्यवहारिक पहलुओं की जांच पड़ताल करानी चाहिए।