जोशीमठ। जोशीमठ-मलारी हाईवे तमक नाले के पास मलबा आने से दूसरे दिन भी खुल पाया, जिससे चीन सीमा क्षेत्र के गांवों के लोगों को मीलों पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है। ग्रामीण दैनिक उपभोग के सामान को भी पीठ में लादकर ले जा रहे हैं। वहीं, हाईवे के अवरुद्ध होने से सीमा क्षेत्र में आईटीबीपी और सेना के वाहनों की आवाजाही भी ठप है। बीआरओ के अधिकारियों ने सोमवार को दोपहर तक हाईवे को वाहनों की आवाजाही के लिए सुचारु करने का दावा किया है।
शुक्रवार को जेलम और तमक नाले में बादल फटने से मलारी हाईवे पर मलबा आ गया। साथ ही जेलम गदेरे के कटाव से करीब डेढ़ सौ मीटर तक मलारी हाईवे बह गया था। शनिवार को सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की ओर से जेलम नाले में हिल साइड कटिंग कर वाहनों की आवाजाही सुचारु की गई, लेकिन तमक नाले में मलबा और बोल्डर अधिक होने से हाईवे सुचारु नहीं हो पाया। हाईवे के बाधित होने से सीमावर्ती गांव नीती, मलारी, बांपा, कैलाशपुर, महरगांव और फरकिया में दैनिक उपयोग की वस्तुओं की सप्लाई ठप हो गई है। मलारी गांव के देव सिंह राणा का कहना है कि इन दिनों भोटिया जनजाति के ग्रामीण सीमावर्ती गांवों में निवास करते हैं। ग्रामीण दैनिक उपयोग की वस्तुओं के लिए तपोवन और जोशीमठ बाजार आते हैं, लेकिन हाईवे के अवरुद्ध होने से ग्रामीणों के सामने रसद व आवश्यक वस्तुओं का संकट खड़ा हो गया है। आईटीबीपी के जवान भी तमक नाले में पैदल आवाजाही कर सीमा क्षेत्र के लिए रवाना हुए। इधर, बीआरओ के कमांडर एसएस मक्कड़ का कहना है कि हाईवे को सुचारु करने के लिए बोल्डरों को विस्फोट से तोड़ा जा रहा है, जबकि मलबे को मशीनों से निस्तारित किया जा रहा है। सोमवार को दोपहर तक हाईवे पर वाहनों की आवाजाही शुरू करा दी जाएगी।