ब्यूरो/अमर उजाला ,ऋषिकेश।
राज्य में सड़क दुर्घटना में जनहानि को रोकने के लिए उच्च न्यायालय गंभीर है, लेकिन सरकारी महकमों पर कोर्ट की सख्ती का असर कहीं नहीं दिख रहा। यही वजह है कि नगर क्षेत्र की लोकल सेवाओं में न तो ओवरलोडिंग रुक रही है और न ही वर्दी पहनने के आदेश का पालन कराया जा रहा है। हाईकोर्ट ने धुमाकोट बस हादसे के बाद राज्य सरकार को सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए कई सख्त कदम उठाने के आदेश दिए थे, जिस पर राज्य सरकार ने शासनादेश जारी कर सवारी व अन्य वाहनों में ओवरलोडिंग मिलने पर उनके चालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने को कहा था।
जीओ संभागीय परिवहन विभाग के ऋषिकेश कार्यालय तक भी पहुंचा, जिस पर एआरटीओ हरकत में आईं और उन्होंने चार सवारी वाहन चालकों पर ओवरलोडिंग के मामले में मुकदमा भी दर्ज कराया। कोर्ट की गाइडलाइन से व्यवसायिक वाहन यूनियनों के पदाधिकारियों को अवगत कराने के लिए बैठक भी की गई, मगर इसके बाद से ही विभागीय कार्रवाई ठप होकर रह गई है। नगर और समीपवर्ती ग्रामीण इलाकों की सड़कों पर चौपहिया और तिपहिया चालक सवारियों को भरकर वाहनों को दौड़ रहे हैं। बावजूद इसके संभागीय परिवहन विभाग, प्रशासन और पुलिस मूकदर्शक बने हुए हैं।
कांवड़ में ओवरलोडिंग रोकना चुनौती
श्रावण मास का शुभारंभ हो चुका है। माह के अंतिम सप्ताह में कांवड़ यात्रा भी प्रारंभ हो जाएगी। अमूमन कांवड़ यात्रा में सवारी वाहनों के साथ शिवभक्तों के वाहनों में ओवरलोडिंग आम हो जाती है। लिहाजा, इस बार न्यायालय की सख्ती और सरकार के शासनादेश का पालन करा पाना संभागीय परिवहन विभाग समेत संबंधित महकमों के अधिकारियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
क्या कहती हैं एआरटीओ
आदेश की जानकारी को लेकर वाहन चालकों और परिचालकों में संशय था। लिहाजा, बैठक कर पहले उन्हें कोर्ट के आदेश से अवगत कराया गया है। नए नियमों का पालन कराया जाएगा। ओवरलोडिंग पर कार्रवाई की जा रही है। विभाग कांवड़ यात्रा में भी इस पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।
- डा. अनीता चमोला, एआरटीओ, ऋषिकेश