श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के सर्जरी विभाग ने साइटस इनवर्सेस टोटलिस (शरीर के आंतरिक अंग विपरीत स्थानों पर होना) मरीज का सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर किया। विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. श्वेताभ प्रधान की टीम ने दो घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद महिला की पित्त की थैली से चार सेंटीमीटर की पथरी निकाली।
मेडिकल साइंस के अनुसार साइटस इनवर्सेस टोटलिस 10 हजार लोगों में से एक को होता है। इसमें मनुष्य के अंग विपरीत दिशा में होते हैं। यानी दिल बांयी के बजाय दांयी ओर व पित्त की थैली, अपेंडिक्स व लीवर दांयी के बजाय बांयी ओर होता है। ऐसी ही रुद्रप्रयाग जिले की एक महिला मरीज को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। करीब 55 वर्षीय महिला के पेट में पथरी थी। उसको ब्लड प्रेशर और शुगर की भी दिक्कत थी।
मेडिकल कॉलेज के सर्जन डा. श्वेताभ प्रधान ने बताया कि महिला के अंग विपरीत दिशा में होने की वजह से उपकरण और औजार भी उल्टे तरीके से चलाने पड़े। सामान्य तरीके से विपरीत काम करने की वजह से बहुत सावधानी से काम करना पड़ा। दिक्कत यह भी थी कि चार सेंटीमीटर के बड़े स्टोन को निकालना था, जो काफी मुश्किल था। उन्होंने बताया कि दो घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद महिला की पित्त की थैली और पथरी निकाली गई।