गोपेश्वर। कुंडी और मोखबगड़ गांव में बरसाती नाले में बादल फटने के बाद मची तबाही से लोग अभी तक सकते में हैं। प्रभावित ग्रामीण मंगलवार को गदेरे के मलबे में बच्चों के स्कूली प्रमाणपत्र, भूमि संबंधी कागजात और सामान ढूंढते रहे। क्षेत्र में आठ भवन पूर्ण और तीक्ष्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। ये परिवार अब टेंट में रहने को मजबूर हैं। पानी की लाइनें क्षतिग्रस्त पड़ी हैं और ग्रामीण गदेरे का पानी पीने को मजबूर हैं। रविवार रात से यहां बिजली सप्लाई भी ठप पड़ी है।
रविवार रात को कुंडी गांव के समीप बरसाती गदेरे में बादल फटने से मोखबगड़ के गंभीर लाल, विनोद लाल, भूपेंद्र लाल और पुष्कर लाल का मकान पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था, जबकि कुंडी गांव में नरेंद्र सिंह, हीरा सिंह, दीवान सिंह और विनोद सिंह के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। कुंडी गांव के तेपाख तोक में जिला पंचायत की पुलिया क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीण गदेरे से ही आवाजाही कर रहे हैं। कुंडी गांव के सुय्या गदेरे में आवाजाही के लिए बनाई गई पुलिया भी बह गई है। मोखबगड़ के गंभीर लाल और विनोद लाल का कहना है कि घर में रखा सारा सामान मलबे में दब गया। स्कूली बच्चों के प्रमाण-पत्र भी मलबे में दब गए हैं। कुंडी गांव के नरेंद्र सिंह का कहना है कि प्रशासन की ओर से रसद उपलब्ध कराई गई है। यदि धुर्मा-कुंडी सड़क वाहनों की आवाजाही के लिए नहीं खुली तो क्षेत्र में आवश्यक वस्तुओं की किल्लत हो जाएगी।
जिन ग्रामीणों के मकान पूर्ण क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें टेंट और तिरपाल मुहैया कराए गए हैं। ग्रामीणों को पीने के पानी की वैकल्पिक व्यवस्था कराई जा रही है। क्षेत्र में रसद की कोई कमी नहीं है। क्षति की रिपोर्ट बनाकर प्रभावितों को मुआवजे का वितरण किया जाएगा। - मोहन सिंह बर्निया, अपर जिलाधिकारी, चमोली।