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छह दिन के बजाय सिर्फ दो दिन का होगा गांव में सोशल आडिट

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कर्णप्रयाग। ब्लाक सभागार में हुई पोखरी, गैरसैंण और कर्णप्रयाग के प्रधानों की बैठक में ग्राम प्रधानों ने एनजीओ की ओर से सोशल ऑडिट कराने का विरोध किया। इसके बाद 62 प्रधानों ने जिला पंचायत राज अधिकारी को अपनी मोहरें सौंपी। दूसरी ओर ग्राम प्रधानों के प्रस्तावित आंदोलन को देखते हुए सीडीओ ने प्रधानों से वार्ता की और आश्वासन दिया कि सोशल ऑडिट एनजीओ की ओर से अब छह दिन के बजाए दो दिन ही किया जाएगा। इस पर ग्राम प्रधानों ने सहमति जताई। ग्राम प्रधानों ने चेतावनी दी यदि ऑडिट के दौरान यदि किसी ग्राम प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्य सहित टोली नायक या ग्रामीण का उत्पीड़न किया गया तो प्रदेश स्तर पर ग्राम प्रधान इस्तीफा देने को मजबूर होंगे।
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ब्लाक सभागार में पोखरी, गैरसैंण और कर्णप्रयाग के प्रधानों की बैठक हुई। ग्राम प्रधानों ने कहा कि एनजीओ की ऑडिट टीम की ओर से गांवों में चुने हुए जनप्रतिनिधियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों का ऑडिट मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। इसके बाद प्रधानों ने सरकार के खिलाफ आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि मनरेगा श्रमिकों को महंगाई के दौर में आज भी 175 रुपये मजदूरी मिल रही है। कई सालों तक श्रमांश और सामग्री अंश का भुगतान नहीं हो रहा है। करीब चार घंटे की बैठक के बाद ब्लाक के 62 प्रधानों ने जिला पंचायत राज अधिकारी बीएस दुग्ताल को अपनी मोहरें सौंपी। वहीं ग्राम प्रधानों के प्रस्तावित आंदोलन को देखते हुए सीडीओ हंसादत्त पांडे, एसडीएम जीआर बिनवाल, बीडीओ एमपी भट्ट प्रधानों से वार्ता को पहुंचे। सीडीओ ने कहा कि ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत किए गए विकास कार्यों का सोशल ऑडिट एनजीओ की ओर से छह दिन के बजाए दो दिन ही किया जाएगा। दो दिन तक गांवों में योजनाओं का सत्यापन करने के बाद एक दिन ब्लाक में समीक्षा की जाएगी। इस पर ग्राम प्रधानों ने सहमति जताई। ब्लाक प्रमुख राधा देवी आर्य ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का उत्पीड़न सहन नहीं किया जाएगा। इस मौके पर कर्णप्रयाग के ब्लाक अध्यक्ष खिलदेव सिंह रावत, गैरसैंण के महावीर सिंह, पोखरी के भगवती जोशी, कनिष्ठ उपप्रमुख सुभाष रावत, क्षेत्र पंचायत सदस्य दिग्पाल सिंह और राजेश्वरी नेगी आदि मौजूद थे।
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