श्रीनगर। भारतीय नौसेना के महत्वपूर्ण नाविका सागर परिक्रमा अभियान दल का नेतृत्व करने वाली लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी ने यहां छात्रों को न सिर्फ सफलता के बल्कि फिट रहने के भी मूल मंत्र दिए। उन्होंने छात्र-छात्राओं के साथ अपनी विश्व परिक्रमा के अनुभवों को भी साझा किया।
शुक्रवार को गढ़वाल विवि के बिड़ला परिसर स्थित एसीएल हॉल में आयोजित कार्यक्रम में वर्तिका जोशी ने बिना लक्ष्य निर्धारण के सफलता हाथ नहीं लग सकती है। इसके लिए शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रहना भी जरूरी है। वर्तिका ने कहा कि विषम परिस्थितियों में ही प्रशिक्षण, मानसिक परिपक्वता, साहस, हौसले और जज्बे की परीक्षा होती है। उन्होंने यात्रा के अनुभवों के बारे में बताया कि करीब नौ माह की अवधि तक सागर में ही रहने के दौरान उन्हें और उनके साथियों को कई कठिनाइयों से गुजरना पड़ा। बावजूद तमाम कठिनाइयों को पार कर इतिहास रचने में उन्हें सफलता मिली। कार्यक्रम में एसएसबी के डीआईजी उपेंद्र प्रकाश बलोदी ने कहा कि नारी की भूमिका के बिना राष्ट्र निमार्ण संभव नहीं है। कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने वर्तिका व उनकी टीम के साहस की सराहना की। वर्तिका के पिता प्रो. पीके जोशी ने कहा कि उनकी बेटी ने भारत की बेटी बनकर इतिहास रचा है। इससे उन्हें गौरव हासिल हुआ। कार्यक्रम में डा. एमएस नेगी, मोहन नैथानी आदि मौजूद रहे। संचालन डा. एसएस बिष्ट ने किया। वहीं वर्तिका की मां डा. अल्पना जोशी ने कहा कि अक्सर अभिभावक कहते हैं कि सपने टूट जाते है, लेकिन हमें अपने बच्चों को बताना होगा कि सपने टूटने के लिए नहीं बल्कि पूरा करने के लिए होते हैं।