जोशीमठ। चट्टान से मलबा और बोल्डर आने से अवरुद्ध हुए जोशीमठ-मलारी हाईवे पर 18 घंटे बाद वाहनों की आवाजाही सुचारु हो पाई है। हालांकि अभी भी चट्टान पर अटका मलबा और बोल्डर खतरे का सबब बने हुए हैं। बारिश के दौरान दोबारा हाईवे के अवरुद्ध होने की आशंका बनी हुई है। यह हाईवे चीन सीमा क्षेत्र को जोड़ता है, जिससे स्थानीय लोगों के साथ ही सेना के जवानों को भी आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा।
गत सोमवार को शाम छह बजे भारी बारिश के दौरान मलारी हाईवे रैणी गांव के समीप मलबा और बोल्डर आने से अवरुद्ध हो गया था। बारिश होने के कारण सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की मशीनें और मजदूर बोल्डरों को नहीं हटा पाए। मंगलवार को बारिश थमने के बाद सुबह सात बजे से हाईवे को खोलने का काम शुरू हुआ। छह घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोपहर एक बजे हाईवे पर वाहनों की आवाजाही सुचारु हो पाई।
बीआरओ के कमांडर एसएस मक्कर का कहना है कि हाईवे को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया है। क्षेत्र में हो रही बारिश के कारण चट्टान से मलबे के साथ बोल्डर हाईवे पर आ रहे हैं। वहीं, मलारी में अपनी आराध्य देवी की पूजा-अर्चना के लिए जोशीमठ से मलारी जा रहे ग्रामीणों को हाईवे अवरुद्ध होने के कारण बैरंग लौटना पड़ा। नंदप्रयाग निवासी यशवंत सिंह का कहना है कि वह अपने परिवार के साथ मलारी जा रहे थे, लेकिन हाईवे अवरुद्ध होने के कारण उन्हें लौटना पड़ा।