ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
चकराता। छावनी परिषद की नई टोल व्यवस्था के विरोध में स्थानीय लोगों के बाद अब छावनी क्षेत्र के सभासद भी मुखर हो गए हैं। इस बाबत सोमवार को कई सभासदों ने छावनी परिषद के उपाध्यक्ष चंदन रावत के नेतृत्व में मुख्य अधिशासी अधिकारी जोन्स विकास से मुलाकात कर विरोध जताया। इस पर अधिशासी अधिकारी ने व्यवस्था के बाबत जल्द ही कोई निर्णय लेने का आश्वासन दिया है।
उपाध्यक्ष चंदन रावत का कहना कि पूर्ववर्ती व्यवस्था के तहत छावनी परिषद स्थानीय लोगों से टोल नहीं वसूलता था। नई व्यवस्था के तहत स्थानीय लोगों से भी टोल टैक्स वसूला जा रहा है। इसके तहत दोपहिया वाहन चालकों से 14 और चौपहिया वाहन चालकों से 20 रुपये शुल्क लिया जा रहा है। छावनी बाजार का व्यापार पूरी तरह से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों पर टिका हुआ है। ऐसे में यदि उनके वाहनों से भी टोल टैक्स वसूला जाएगा तो ग्रामीण खरीददारी के लिए चकराता बाजार आना छोड़ देंगे। चंदन रावत ने कहा कि जनता के विरोध को देखते हुए बोर्ड बैठक में निर्णय को वापस लेने का प्रस्ताव पारित किया जाएगा। वहीं सीईओ जोन्स विकास ने कहा कि ठेकेदार से बोर्ड की शर्तों पर कार्य करने की बात कही जाएगी। यदि बात नहीं बनी तो निविदा को रद्द कर पूर्व की भांति टैक्स वसूला जाएगा। वार्ता करने वालों में सभासद आनंद राणा, कमल रावत, मोनिका अग्रवाल, राजेश तोमर, कार्यालय अधीक्षक संजय गुप्ता, चतर सिंह कप्तान (सेनि.) चेतन शामिल रहे।
व्यापार मंडल ने भी जताया विरोध
छावनी क्षेत्र की टोल व्यवस्था को निजी हाथों में दिए जाने का चकराता व्यापार मंडल ने भी विरोध किया है। आर्य समाज मंदिर में सोमवार को हुई बैठक में मंडल अध्यक्ष विवेक अग्रवाल ने कहा कि यदि छावनी परिषद निर्णय जल्द वापस नहीं लेगा तो आंदोलन को बाध्य होना पड़ेगा। पूर्व उपाध्यक्ष पंकज जैन ने आरोप लगाया कि चकराता छावनी परिषद को केंद्र सरकार से मोटा बजट मिलता है। ऐसे में टोल के नाम पर आम जनता से कर वसूल कर उनका शोषण किया जा रहा है। संजय जैन ने कहा कि यह निर्णय चकराता छावनी बाजार के साथ ही पूरे जौनसार बावर को प्रभावित करने वाला है। बैठक में राजवीर राठौर, तीर्थ कुकरेजा, संजय जैन, अमित जोशी, गुमान सिंह, हरीश कुमार, साकेत माहेश्वरी, अमित अरोरा, राहुल चांदना, श्याम वोरा, अर्जुन देव, मनमोहन चौहान, सुनील जैन, अनुपम जैन, सुनील गुलाटी, हेमंत बिष्ट, हरचरन सिंह, गुरुचरण सिंह आदि मौजूद रहे।