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छावनी परिषद में टोल व्यवस्था का शुरू हुआ विरोध

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ब्यूरो/अमर उजाला/चकराता।
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छावनी परिषद चकराता द्वारा प्राइवेट वाहनों पर शुरू की गई टोल व्यवस्था का लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि टोल की पूर्ववर्ती व्यवस्था लागू नहीं की गयी तो वह परिषद के विरुद्ध उग्र आंदोलन करेंगे। वही परिषद के सभासद बोर्ड की अनुमति के बिना फैसला लागू होने की बात कह रहे हैं।
छावनी परिषद की ओर से टोल वसूला जाता था, जोकि सिर्फ टैक्सी वाहनों से लिया जाता और पर्यटकों के वाहनों से पार्किंग फीस ली जाती थी। लेकिन एक जुलाई से चकराता की टोल व्यवस्था प्राइवेट ठेकेदार के हाथ में दे दी गई है। ठेकेदार ने रविवार को आने वाले सभी दोपहिया वाहनों से 10 रुपये पार्किंग और 4 रुपये एंट्री फीस वसूलने शुरू कर दिए है। वहीं प्राइवेट चार पहिया वाहन से 10 रुपये एंट्री फीस और दस रुपये पार्किंग फीस ली गई जबकि पर्यटकों के वाहनों से 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से लेने आरंभ कर दिया है। जिसका स्थानीय लोगों व ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। साथ ही बाजार में सभासद कमल रावत और आनंद राणा का घेराव कर इस व्यवस्था को पूर्व की भांति लागू कराने की मांग की।
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स्थानीय निवासी जयपाल राणा, मोनित दुसेजा, मनमोहन चौहान, सुनील जैन, रवीश अरोरा आदि का कहना है कि कहीं भी प्राइवेट वाहनों से टोल नहीं लिया जाता है। कहा कि पूर्व की भांति टैक्सी व पर्यटक वाहनों से टोल लिया जाना चाहिए। कहा कि परिषद कैंट क्षेत्र में स्थानीय निवासियों से पार्किंग के नाम पर 150 रुपये लेने की बात कर रहा है, जबकि कैंट के पास पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले कैंट पार्किंग की व्यवस्था करे उसके बाद पार्किंग शुल्क लगाया जाए। कहा है कि यदि परिषद ने अपने इस फैसले को वापस नहीं लिया तो वह उग्र आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ेगा।
छावनी प्रशासन ने दरें खुद की लागू
वहीं बोर्ड उपाध्यक्ष चंदन रावत व सभासद आनंद राणा और कमल रावत का कहना है कि सिर्फ टेंडर को बोर्ड मे रखा गया था व टोल की दर उनके द्वारा तय नही की गई है। छावनी प्रशासन ने स्वयं ही इसे लागू किया है व वह जनता के साथ है।
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कांग्रेस ने किया टोल व्यवस्था का विरोध
विकासनगर। क्षेत्रीय विधायक और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने फोन पर हुई वार्ता में कहा कि कांग्रेस टोल व्यवस्था को प्राइवेट हाथों में ले जाने का पुरजोर विरोध किया करती है। यदि छावनी परिषद ने इस निर्णय को वापस नहीं लिया तो कांग्रेस को छावनी परिषद कार्यालय में धरना प्रदर्शन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय लोगों के हितों के साथ किसी भी तरह की उपेक्षा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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