लक्ष्मी प्रसाद कुमेड़ी
कर्णप्रयाग। गैरसैंण में रामगंगा पर झील बनाए जाने के लिए भूगर्भ वैज्ञानिकों की हरी झंडी के बाद अब सिंचाई विभाग ने अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी है। इसकी डीपीआर तैयार की जा चुकी है और जल्द इसे राज्य सरकार को भेजा जाएगा। यहां बनने वाली 700 मीटर झील के पानी से गैरसैंण सहित आसपास पानी की आपूर्ति की जाएगी। हालांकि इस झील से भी भराड़ीसैंण को पानी नहीं पहुंच पाएगा।
गैरसैंण में पानी जुटाने के लिए सरकारों ने कभी आटागाड़ नदी से तो कभी सिमली के पिंडर और कभी नारायणबगड़ के पिंडर नदी से योजनाएं तैयार करने की बात कही, लेकिन धरातल पर सर्वे के अलावा काम नहीं हुआ। वर्ष 2017 में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पानी के लिए रामगंगा नदी पर झील बनाने की घोषणा की थी, जिसका भूगर्भीय सर्वे पिछले हफ्ते किया गया। सर्वे में हरी झंडी मिलने के बाद अब यहां करीब 700 मीटर झील बनाए जाने का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन इस झील से भी भराड़ीसैंण को पानी नहीं पहुंच पाएगा। ऐसे में विधानसभा परिसर के साथ ही आस पास के गांव सारकोट, परवाड़ी सहित अन्य गांवों को अभी पानी के लिए इंतजार करना होगा। हालांकि अब तक भराड़ीसैंण को दूधातोली से पानी की आपूर्ति की जाती है, लेकिन यहां सत्र आयोजन के दौरान दूधातोली की लाइन का पानी पर्याप्त नहीं होता है। यही नहीं भराड़ीसैंण से लगे सारकोट और परवाड़ी गांवों की दो हजार से अधिक आबादी के लिए पेयजल योजनाओं की जरूरत है।
कोट
भूगर्भीय सर्वे में पास होने के बाद अब प्रस्तावित जगह की टेस्टिंग की जानी है, जिसमें मृदा परीक्षण, पानी की टेस्टिंग, पीएच वैल्यू सहित 18 टेस्ट किए जाने हैं। एक दो दिनों में काम शुरू हो जाएगा। भराड़ीसैंण की दूरी करीब 16 किमी होने से झील का पानी नहीं चढ़ पाएगा। ऐसे में झील का पानी केवल गैरसैंण सहित आस पास के इलाकों की 12 हजार आबादी के लिए हो पाएगा। - धनवंत्री त्रिपाठी, अवर अभियंता सिंचाई विभाग गैरसैंण।